सरकार की ढुल मुल नीति और उसके परिणाम



हर दिन रह बीमार हमें तेरी सेहत से क्या लेना !!
56 " इंची कहा गया नित मरे हमारी सेना !! 
करदो नाटक बंद तुम्हारी बहुत हुयी नौटंकी ,!
करो दिखावा बंद झूटी बात तुम्हारे " मन की "!! 
तुम क्या जानो दर्द सियासत में बेदर्द मुखोंटे ,!
बनकर ईमानदार तुमने दाम कमाए मोटे !!
वो ही पाकिस्तान तुम्हे अब गुड सा हो गया मीठा !
करी बुराई उसकी हर दिन तभी चुनाव जीता !!
सेना मरती रोज बने हो तुम ऐसे निर्मोही !
रुदन करत माँ भारती रात दिना न सोई !!
15 दिन का पुत्र देख जब पिता को अग्नि लगाये !
धरती फटती देख द्रश्य जब पत्नी फूल चढ़ाये !!
# देश के शहीदों को शत शत नमन

लोकत्रंत्र को चुनोती

देश ने अपने लोकतान्त्रिक इतिहास में बहुत उतार चढाव देखे है ,कभी बहुत मजबूत लोकतंत्र और कभी बहुत भयावह स्थिति वाला आपातकाल ,एक तरह से आप उसे हाब्स का कटा हुआ सर वाला लोकतंत्र कह सकते है !! लेकिन इसी दौर के कुछ चुनिन्दा तेज तर्रार नेताओ के योगदान को भी नही भुलाया जा सकता ,उन्ही के प्रयासों से वो राजनैतिक अस्थिरता का दौर भी जाता रहा | जयप्रकाश नारायण ,के आन्दोलन को कोई कैसे भूल सकता है | मोरारजी देसाईं ,चौधरी चरण सिंह , चन्द्रशेखर ,अटल विहारी बाजपेयी ये कांग्रेस अभिनीत सरकार से मुखर थे ,इन सभी को जेलों में रहना पड़ा !!लेकिन सरकार के विरोध के बाबजूद भी ये राजनेता अपने वजूद को बचाने  में कामयाब हो पाए !! उसका एक कारण यह भी था कि उनका राजनैतिक आधार बहुत मजबूत था ,जिसका आधार मजबूत हो और उसकी राजनैतिक महत्वाकांक्षा न हो ऐसा कैसे हो सकता है ? इसी के  फलस्वरूप आगे सरकारों का पतन होता रहा !! 1977 के हुए आम चुनावो में कांग्रेस को भारी पराजय का सामना करना पडा | मोरारजी देसाई जी के नेतत्व में सरकार का गठन हुआ , लेकिन मोरारजी यही पर एक गलती कर गए ? उन्होंने तत्कालीन रक्षामंत्री जगजीवनराम को उपप्रधानमन्त्री बना दिया ,इस पर बबाल मचना लाजिमी था !!देसाई जी की प्रष्ठभूमि गैर कांग्रेसी नही थी , सत्ता संतुलन में भी उनका वही कांग्रेस पुट नजर आया | उन्होंने दलित और स्वर्ण का मेल अपनी सरकार में रखा , लेकिन अपनी तेजतर्रार छवि और किसान आन्दोलन के अगवा चौधरी चरण सिंह को जगजीवन राम का उप् प्रधानमन्त्री बनना नागवार लगा, और अपनी नाराजगी से देसाई जी को अवगत कराया  | मजबूरन देसाई जी को एक और उप प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करनी पड़ी और यही फिर आगे चल कर उनकी सरकार के पतन के कारणों में से एक भी था !! मैं ऐसा इसलिए लिख रहा हूँ कि पुराने राजनेताओ की अवधारणा आज भी जिन्दा है ,मह्त्वाकाक्षा उतनी ही है ,लेकिन अगर कम हुआ है तो वो है जनता के प्रति उनकी जवाब देही ,देश के प्रति उनका मोह !!! झूठ राजनैतिक जीवन का एक हिस्सा होता है इसमें कोई शक नही ,लेकिन तब और अब में बहुत फर्क है बढ़ते तकनिकी युग में हमारे नेता भी उतने ही हटधर्मी हो गए है कि कोई शार्टकट लेने से नही चुकते !!! जनता आज भी इन फरेबियो के जाल में फस जाती है | सरकार में बैठे लोग अपने फायदे के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते है , और पहले भी ऐसा करते रहे है लोग ,लेकिन अब जो हथकंडे अपनाये जा रहे है वो छुप नही पाते ,आम जन की नजरों में आने पर सरकार की छीछालेदर होना लाजिमी है ,पहले प्रिंट मीडिया में किसी खबर को छपने पर ही हंगामा हो जाता था , लेकिन अब तो हर घंटे पर नई खबर आपको देखने को मिलेगी , इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है , भरोसा टुटा है नैतिकता का पतन तो हुआ ही है जवाबदेही भी उतनी नही है ,क्यूंकि कोई भी खबर एक दिन से ज्यादा हंगामा करती नही , तो लोग एक दो दिन चुप रह कर ही समय निकालना बेहतर समझ लेते है और जैसे ही हंगामा खत्म वही ढाक के पात वाली कहानी होती है !!!कहने का मतलब लोकत्रंत्र सुद्र्ण नही हुआ है ,अभी नए सिरे से खतरे की घंटी बजनी शुरू हो गयी है ,प्रवर्तन निदेशालय और सी बी आई के बढ़ते दखल  जलती आग में घी का काम कर रही है ,जरुरत है सरकार के चारो स्तंभों को मजबूत बनाया जाये साथ ही बिपक्ष भी अपनी भूमिका न्याय पूर्ण तरीके से निभाए जिससे जनता में भरोसा जगे और जनता इसे पूर्ण रूप से स्वीकार करे !!!