मसला अपनी पहचान का

 राम राम सा

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

दुष्यंत कुमार द्वारा लिखित ये पंक्तियां उद्वरित करने का क्या कारण हो सकता है ,लेकिन कौम के नाम पर जगह जगह दुकान खोलकर बैठे ठेकेदारों को जगाने के लिए एक प्रयास भर है ,समाज शिरोमणि समूचे विश्व मे अपनी अमिट पहचान रखने वाले मुग़लों को नेस्तनाबूद करने वाले दिल्ली की सल्तनत को झुकाने वाले महाराजा सूरजमल जी के तेज पर कुछ दुष्ट समझ के लोग उंगली उठा रहे हैं ,सोनी टीवी पर प्रसारित धारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई में महाराजा सूरजमल जी के किरदार को कमतर आंकने की गन्दी सोच जो धारावाहिक के निर्माता  निलेश निनाद वैद्य और प्रसन्नकुमार नितिन वैद्य द्वारा अपनाई गई है उस पर लोगो की चुप्पी बहुत दुखदाई है ,जिंदा कौम वक़्त का इंतजार नही करती और न ही जंग से किसी को बुलावा आता है !! जिसका जमीर मर गया वो न अपने लिए जिंदा है और न अपनी कौम के लिए !! हाल ही में सावरकर के समर्थन में बड़े पुतले फूंके गए थे लेकिन आज उन्हें दर्द नही हो रहा ?? कुछ दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भरतपुर वालों को बिन पैंदी का लोटा कहता रहा किसी को दर्द नही हुआ ....क्या सचमुच हम लोग मर गए हैं ?

कुछ तो अपना जमीर रक्खो संभाल के मरने से पहले मरना अच्छा नही होता !! बड़ी बड़ी हांकने वाले अब चुप क्यों हैं किसी को भी थोड़ा सा लिहाज अपनी पहचान को बचाने का नही आ रहा .....क्या लड़ाई लड़ेंगे हम लोग जब किसी की बातें ही नही चुभी तो बाकी की बातें तो बेमानी है ..सोइये खूब जब सब कुछ खत्म हो जाये तो कहना कि हमे तो कुछ मालूम ही नही था ....सांप निकल जायेगा लकीर को पीटते रहना ...... जो अपना इतिहास सलामत नही रख पाते दुनियां उन्हें भुला देती है ....उम्मीद है कुछ तो जगेंगे अपनी पहचान को बचाने को इसी उम्मीद में ......

आपका

निर्भय सिंह बडेसरा

काला धन या काला मन !!!

 मित्रों !!! 8 नबंबर ???

काला दिन, या काला धन !!! अपने अपने तथ्य ,और अपने अपने दावे ?? पर इन सब की तह में कौन जाये !! समाज का हर तबका इससे प्रभावित हुआ है . सबके अपने दुख सबके अपने व्यापारिक मतलब !!!

एक वर्ग रोजाना दो जून की रोटी के लिये मशक्कत कर रहा है तो एक वर्ग ऐसा भी है कि अपने धन्धे का ज्यादातर समय CA के आस पास गुजार रहा है .एक तबका अभी भी उम्मीद लगाये बैठा है कि पता नहीं " मित्रों " जैसा प्यार भरा शब्द न जाने कब कानों में दुबारा फिर से पुहुंच जाये !!! मैं मेरे दुख से दुखी नहीं पर दूसरे के सुख से दुखी हूँ !!! जो दूसरे के सुख से दुखी थे ,वो सरकार के इस तुगलकी फरमान से बहुत खुश हुये!!!!बाकी एक तबका और है  जो इस बात की बढ चढ कर तारीफ करता है वो है बिना योग्यता सरकारी नियुक्तियां पाने वाला !!! जिसने कभी सरकारी बस में किराया नहीं दिया ,हजार दो हजार के कमिशन से काम चलाने वाले हमें सरकारी तंत्र की उपयोगिता अपने आका के सामने ऐसे बखान करते है जैसे इलाके में इनके बारे में कोई कुछ नहीं जानता हो ...बड़ी नफरत होती है जब वो अपने चरित्र से उलट भाषण देते है ..पर करोगे क्या ??? एक अंग्रेजी कहावत है " राजनीति भ्रष्ट पुरूष का सबसे अंतिम घर होती है !!!!! तो लडिये इन बेईमांन लोगो से गुबार निकालिये अपना ज़िससे ये हमारे जीवन को खत्म करने वाले कोई तुगलकी फरमान फिर से जारी न कर सके !!!!

उम्मीद है आप सब एक जुट होकर जनमानस के खिलाफ सरकार द्वारा थोपे गये किसी भी फरमान का बिरोध करेंगे !

आपका 

निर्भय सिंह बडेसरा

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना भविष्य की जीवनदायिनी

 राम राम सा

ERCP में दक्षिण पूर्वी राजस्थान के13 जिलों में जिनमे कोटा बूंदी झालावाड़ बारां भरतपुर करौली धौलपुर सवाईमाधोपुर जयपुर अलवर दौसा अजमेर एवं टोंक को शामिल किया जाना है 

ये परियोजना राजस्थान के23.67प्रतिशत क्षेत्र को कवर करेगी जिससे राज्य की 41.13 प्रतिशत आबादी लाभान्वित होगी 

ERCP के तहत चम्बलऔर उसकी सहायक नदियां कुन्नू पार्वती कालीसिंध मेज के अतिरिक्त पानी को बनास बाणगंगा गंभीरी नदी में डाला जाएगा

ERCP से दक्षिण पूरी राजस्थान में 2.8 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र जे साथ 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुधार होगा इसके तहत 1268 किलोमीटर कैनाल तंत्र विकसित किया जाएगा ।

ERCP के द्वारा 1723 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पेयजल के लिए 286.4 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM )उधोगों के लिए 1500.4 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM ) सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा 

ERCP के द्वारा दिल्ली मुंबई आर्थिक गलियारे ( DMIC) को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा जिससे राज्य में निवेश बढेगा और उधोगों का विकास होगा एवम लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।।

ERCP की राष्ट्रीय जल योजना को 19 नवंबर 2017 को DPR भेजी जा चुकी है फिर भी केंद्र सरकार इसको राष्ट्रीय परियोजना घोषित नही कर ही है।

हम सभी क्षेत्र वासियों को मिलकर इसे केंद्र सरकार से राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाकर इस ओर अतिशीघ्र कार्य शुरू की मांग करनी होगी जिससे दक्षिणी पूर्वी राजस्थान के लोगों को सिचाई, पेयजल के साथ क्षेत्र के उधोगों के लिए जल उपलब्ध हो सके ।

सभी क्षेत्र बासी मिलकर आवाज उठाये जिससे ERCP पर कार्य शुरू किया जा सके ।

अभी केंद्र सरकार में  जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी राजस्थान से ही है साथ ही लोकसभा में पूरे 25 सांसद वर्तमान सरकार के दल से है जो कि राज्य का सौभाग्य है ।

DPR में भरतपुर को पानी की उपलब्धता धौलपुर से दिखाई गई है इसमे बहुत बड़ा तकनीकी झोल है धौलपुर से भरतपुर को पानी किसी नहर के जरिये लाना बड़ी टेडी खीर है क्योंकि प्राकृतिक ढलान धौलपुर की तरफ है ऐसे में बिना किसी लिफ्ट के पानी को चढ़ाना मुश्किल है साथ ही भरतपुर की नगर डीग सीकरी कामा तहसीलों तक पानी को पुहुचाने में ज्यादा पैसे की जरूरत होगी ।

भरतपुर को पानी की उपलब्धता उसके प्राकृतिक ढलान के जरिये की जानी चाहिए जिससे जमीन की उपलब्धता और पानी को नौसर्गिक तरीके से समूचे क्षेत्र को उपलब्ध कराया जा सके । जिलेका कुछ भाग जो इन योजना में नही आता है उसको जोड़ने की मांग हम सभी को मिलकर साथ मे करनी है । और उसे DPR में जुड़वाने के लिए सामुहिक प्रयास करने होंगे ।

इस मुद्दे का समाधान हो जाने पर चंबल के पानी आपके खेतो में नहर के द्वारा आ जायेगा जो खेती और पशुधन के लिए कारगर होगा जिससे क्षेत्र की दशा और दिशा बदल जाएगी ।।

 आप अभी सम्मानित महानुभावों से निवेदन है आप किसी भी दल या संगठन के सदस्य हैं लेकिन भरतपुर को अपनी पार्टी हितों से ऊपर रखिये इसके लिए सामुहिक प्रयास ही इसमे सफलता दिला सकते हैं ।

आप सभी अपने अपने स्तर से इस मुहिम के लिए पूरे जिले में एक माहौल बनाने की कोशिश करें और सोशल मीडिया प्रिंट मीडिया नुक्कड़ सभाओं द्वारा जनजागृति अभियान चलाए जाएं जिससे हम सब की आवाज केंद्र सरकार के कानों में जाकर सुनाई दे जिससे इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिले और सरकार वित्तीय स्वीकृति जारी करे

इस परियोजना में करीब 40 हजार करोड़ का खर्च आएगा इसका 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा और 10 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान सरकार द्वारा देय होगा ।

आप सभी से पुरजोर निवेदन है आप इस भविष्य की भागीरथी को अपने क्षेत्र के लाने के लिए इस मुहिम का हिस्सा जरूर बने आशा ही नही वरन पूर्ण विश्वास है आप जरूर अपने अपने स्तर से इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे आप सभी से आशातीत

आपका

निर्भय सिंह बडेसरा

उदाहरण सरकारी इंतजाम का

 राम राम सा 


एक बड़े जिले के डीएम साहब के बैडरूम की खिड़की

सड़क की ओर खुलती थी।

रोज़ाना हज़ारों आदमी और वाहन उस सड़क से

गुज़रते थे।


डीएम साहब इस बहाने जनता की परेशानी और

दुःख-दर्द को निकट से जान लेते।

एक सुबह डीएम साहब ने खिड़की का परदा

हटाया।

भयंकर सर्दी, आसमान से गिरती ओस, और भयंकर

शीतलहर।

अचानक उन्हें दिखा कि बेंच पर एक आदमी बैठा है।

ठंड से सिकुड़ कर गठरी सा होता।


डीएम साहब ने पीए को कहा- उस आदमी के बारे

में जानकारी लो और उसकी ज़रूरत पूछो !!!

दो घंटे बाद। पीए ने डीएम साहब को बताया-

सर, वो एक भिखारी है। उसे ठंड से बचने के लिए एक

अदद कंबल की ज़रूरत है।


डीएम साहब ने कहा- ठीक है, उसे कंबल दे दो।

अगली सुबह डीएम साहब ने खिड़की से पर्दा

हटाया। उन्हें घोर हैरानी हुई। वो भिखारी अभी भी

वहां जमा है। उसके पास ओढ़ने का कंबल अभी तक

नहीं है। डीएम साहब गुस्सा हुए और पीए पूछा- यह क्या है???


उस भिखारी को अभी तक कंबल क्यों नहीं

दिया गया???


पीए ने कहा- मैंने आपका आदेश तहसीलदार

महोदय को बढ़ा दिया था।

मैं अभी देखता हूं कि आदेश का पालन क्यों नहीं

हुआ।।।


थोड़ी देर बाद तहसीलदार साहब डीएम साहब के

सामने पेश हुए और सफाई देते हुए बोले- सर, हमारे

शहर में हज़ारों भिखारी हैं। अगर एक भिखारी

को कंबल दिया तो शहर के बाकी भिखारियों

को भी देना पड़ेगा। और शायद पूरे जिले में भी।

अगर न दिया तो आम आदमी और मीडिया हम

पर भेदभाव का इल्ज़ाम लगायेगा।।।


डीएम साहब को गुस्सा आया- तो फिर ऐसा

क्या होना चाहिए कि उस ज़रूरतमंद भिखारी

को कंबल मिल जाए???

तहसीलदार साहब ने सुझाव दिया- सर, ज़रूरतमंद

तो हर भिखारी है।।।


प्रशासन की तरफ से एक 'कंबल ओढ़ाओ, भिखारी

बचाओ' योजना शुरू की जाये।

उसके अंतर्गत जिले के सारे भिखारियों को कंबल

बांट दिया जाए।।।


डीएम साहब खुश हुए।।।


अगली सुबह डीएम साहब ने खिड़की से परदा

हटाया तो देखा कि वो भिखारी अभी तक बेंच

पर बैठा है।


डीएम साहब आग-बबूला हुए।

तहसीलदार साहब तलब हुए।

उन्होंने स्पष्टीकरण दिया- सर, भिखारियों की

गिनती की जा रही है ताकि उतने ही कंबल की

खरीद हो सके।


डीएम साहब दांत पीस कर रह गए।

अगली सुबह डीएम साहब को फिर वही

भिखारी दिखा वहां।।।


डीएम साहब खून का घूंट पीकर रहे गए।।।

तहसीलदार साहब की फ़ौरन पेशी हुई।

विनम्र तहसीलदार साहब ने बताया- सर, बाद में

ऑडिट ऑब्जेक्शन ना हो इसके लिए कंबल ख़रीद

का शार्ट-टर्म कोटेशन डाला गया है।

आज शाम तक कंबल ख़रीद हो जायेगी और रात में

बांट भी दिए जाएंगे।।।


डीएम साहब ने कहा- यह आख़िरी चेतावनी

🏾 है।।।


अगली सुबह डीएम साहब ने खिड़की पर से परदा

हटाया तो देखा बेंच के इर्द-गिर्द भीड़ जमा

है।।।


डीएम साहब ने पीए को भेज कर पता लगाया।।।।

पीए ने लौट कर बताया- सर कंबल नहीं होने के

कारण उस भिखारी की ठंड से मौत हो गयी है।।।

गुस्से से लाल-पीले डीएम साहब ने फौरन से

पेशी पर  तहसीलदार साहब को तलब किया।

तहसीलदार साहब ने बड़े अदब से सफाई दी- सर,

खरीद की कार्यवाही पूरी हो गई थी। आनन-

फानन हमने सारे कंबल बांट भी दिए, मगर

अफ़सोस कंबल कम पड़ गये।।।


डीएम साहब ने पैर पटके- आख़िर क्यों???

मुझे अभी जवाब चाहिये।।।


तहसीलदार साहब ने नज़रें झुका कर कहा- सर,

भेदभाव के इल्ज़ाम से बचने के लिए हमने

अल्फाबेटिकल आर्डर(वर्णमाला) से कंबल बांटे।

बीच में कुछ फ़र्ज़ी भिखारी आ गए।

आख़िर में जब उस भिखारी का नंबर आया तो कंबल

ख़त्म हो गए।।।।


डीएम साहब चिंघाड़े- आखिर में ही क्यों???


तहसीलदार साहब ने बड़े भोलेपन से कहा-

क्योंकि सर, उस भिखारी का नाम 'ज्ञ' से शुरू

होता था।।।


ऐसे हो गए हैं हम और ये है आज का सिस्टम.

यदि साहब खुद ही जा कर एक कम्बल चुपके से उस भिखारी को ओढा देते तो एक जान तो बच सकती थी 

दोस्तों सेवा करनी है तो खुद आगे बड़ो किसी को आर्डर या किसी का इंतजार मत करो खुद से जितना हो सके सेवा करते चलो ,सेवा ,सेवा के भाव से करिये जिससे आपको उसका सही प्रतिफल मिले इसी तरह की उम्मीदों के साथ ......


आपका

निर्भय सिंह बडेसरा 

(साभार एक परिचित मित्र का )

आपबीती

 राम राम सा 

दोस्तो ,दुनियां में सब कुछ स्थिर नही है ,न सुख, न दुख , सब एक न एक दिन बदलती छाया जैसा !! लेकिन मन चंचल है जब तक नही मानेगा जब तक कि उसे जिंदगी में टक्कर रूपी अहसास नही हो जाता !! कहानी अपने दुःख की,अपने दर्द की खुद से बड़ा आत्मलोकन करने वाला कोई हो नही सकता !! दुनियां में हर बस्तु उपलब्ध है अब निर्भर अपने आप पर करता है कि आप पाना क्या चाहते हो ! मित्रो बात अगस्त 2016 की है मैं उन दिनों मैं रिलाइंस जिओ में डिप्लॉयमेंट इंजीनियर था ,जिंदगी अपनी रफ्तार से ठीक चल रही थी ,मुझे Gmail पर एक मेल आया और मेल था BHR pharmacuetical company London से भेजने वाले ने बताया कि हमारी कंपनी दौड़ने वाले घोड़े और शेरों के Anti-viral vaccine बनाती है और उसके लिए row material भारत से मंगवाते है !! आप चाहो तो इस business को कर सकते हो ? मैंने उनसे कहा कि आपको अब तक जो सप्लाई दे रहा है उसी से लेते रहो मुझसे क्यों मांग रहे हो ,इस पर जवाब आया कि हम कंपनी के मार्केटिंग ब्रांच से है जो लोग अभी तक हमे सप्लाई दे रहे है उन्होंने रेट बढ़ा दी है और वो हमें बीच का मार्जन नही दे रहा !! मैंने कंपनी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की और इंग्लैंड की कम्पनी मामलों के मंत्रालय को लिखा कम्पनी की विश्वसनीयता के बारे में पूछा ,?सरकारी मंत्रालय का जवाब सकारात्मक था उन्होंने कंपनी का पता भी वही दिया जो मेल में आया था तो भरोसा बढ़ा ,फिर भी एक दूर के रिश्ते का एक बच्चा लंदन में TCS में जॉब करता था उसके द्वारा कंपनी के होने की जानकारी मंगवाई उसने भी कंपनी के मुख्य द्वार का फोटो भेज दिया ,इस पर उसी तथाकथित मार्केटिंग हेड के बताए पते पर बात करना शुरू किया तो काफी दिनों में जवाब आया कि आप हमारे प्रोडक्ट ऑर्गेनिया हर्बल सीड्स को भारत मे भी बेचोगे या बाहर !!अगर बाहर बेचोगे तो हमसे अग्रीमेंट करना पड़ेगा ,उनसे अग्रीमेंट हुआ कि अगर माल नही बिका तो एक महीने में कंपनी माल बापस ले लेगी !! कीमत काफी महंगी थी सिर्फ  100 ग्राम 70 हजार का था ,10 पैकेट के अगस्त 29 , 2016 को 7 लाख उनके खाते में डाले और पुणे महाराष्ट्र से जरिये कोरियर 10 पैकेट आ गए !! उनको लेकर 6 सितंबर 2016 को लेकर दिल्ली गया ,होटल मौर्य शेरटन में एक नाइजीरिया के व्यक्ति से मुलाकात हुई ,उसने सामान देखकर बताया कि यही प्रोडक्ट है ,अब आप अपने स्टॉक में 100 पैकेट दिखाओ तब कंपनी आपसे पूरी साल का सौदा करेगी ,मैंने उनसे अग्रीमेंट किया और धीरे अपने कुछ साथ के परिचितों को भी बताया उन्होंने भी इसमें पैसे लगा दिये ,धीरे धीरे हमने 100 पैकेट  12 दिसम्बर 2016 को अपने पास मंगवा लिए !!पैकेट पूरे होने पर इंग्लैंड कम्पनी को मेल किया कि स्टॉक पूरा है आप सामान ले जाओ !! वहां से जो जवाब आया उसमे लिखा आप मे सप्लायर बनने की क्षमता नही है कम्पनी आपसे कोई लेन देन नही कर सकती !!सुनकर पैरों तले जमीन निकल गयी !!ये साबित हो चुका था कि फ्रॉड हो गया है जो साझीदार फायदे में साझीदार थे अब साहूकार हो गए उसी दौरान 22 दिसम्बर को मेरा भयानक एक्सीडेंट हो गया ,करीब दो महीने हॉस्पिटल में ,घर में चारपाई पर ही पड़ा रहा !! घर पर तगादे आने लगे ,उसी दौरान 2 महीने रिलाइंस आफिस नही जाने पर जॉब छूट गयी !! हार कर 25 फरबरी 2017 को श्री रविन्द्र कुंतल जी एडवोकेट(अब जज बन चुके है ) और राजवीर सिंह जी से मिला ,दो दिन तक ये मामला समझ मे ही नही आया !! फिर 28 फरबरी को न्यायालय में इस्तगासा दाखिल किया ,न्यायालय श्रीमान ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया ,न्यायालय के क्षेत्राधिकार की वजह से ये मामला थाना अटलबन्द को सौंपा गया !! सबसे पहले जांच ASI रामकिशन जी को सौंपी गई उन्होंने जितना बना मई तक काम किया !! एक दिन मैं तत्कालीन CO city आदरणीय आबडदान रतनु सर से मिला और अपनी परेशानी बताई CO साहब ने हाथों हाथ तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर श्री दीपक ओझा जी से फोन पर इस बाबत कहा ,मैं ओझा सर से मिला और जांच उपनिरीक्षक(प्रशिक्षु ) श्री मनीष शर्मा जी को दी बहुत सह्रदय और त्वरित कार्यवाही करते हुए अपनी टीम में इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हेड कांस्टेबल श्री जोगेन्द्र सिंह निबासी बसैया जाट को शामिल करके साथ मे कॉन्स्टेबल अरबिंद कुमार (जो अब शिक्षक ) और कॉन्स्टेबल रविकांत को शामिल करके जुलाई 2017 के पहले हफ्ते में नाइजीरिया निबासी ओकेलु माइकल को लगातार पुणे में 5 दिन रात कड़ी मेहनत करके गिरफ्तार किया ,!! जुलाई 12 ,2017 को इसे कोर्ट में पेश किया और परिणाम आप सबके सामने है ……. मेरे साथ घटित इस पूरे प्रकरण में मुझे बहुत सहयोग मिला उन जगहों से जहाँ से उम्मीद नही थी ,और वो दरवाजे बंद हो गए जहां से उम्मीद रखता था ,मैं अहसानमंद हूँ CI श्री दीपक ओझा जी का sub insp श्री मनीष शर्मा जी का विशेषकर हैडकांस्टेबल श्री जोगेंद्र जी का ,ASI रामकिशन जी का ,CI श्री अनिल डोरिया जी का ,बहुत ही मिलनसार ASI श्री रामगोपाल जी हेडकांस्टेबल उपाध्याय, हेडकांस्टेबल हरवीर सिंह जी अब इस दुनियां में नही रहे भाई मेमलाल जी ,हेडकांस्टेबल भाई प्रहलाद जी कुंतल और समस्त अटलबन्द थाने के स्टाफ ने मुझे सहयोग किया ,मैं कुछ नही कर सकता था लेकिन ये जितने भी नाम है मेरी जिंदगी में भगवान के रूप में आये और मुझे सहयोग किया ,कोर्ट में मामला चलने पर वकील हर तारीख पर फीस मांगता है लेकिन मेरे इस प्रकरण में ये धारणा टूट गयी मेरे वकील मेरे लिए किसी फरिस्ते से कम नही है मुझे बिना किसी लालच के बिना कुछ लिए अब तक सहयोग करते रहे है ...भगवान आप सभी को जीवन की हर तरक्की दे ...यही दुआ करता हूँ 


पेड़ हूं,

हर रोज़ गिरते हैं पत्ते मेरे


फिर भी,

हवाओं से बदलते नहीं रिश्ते मेरे


….जंग जारी है है बाकी फिर कभी ,अपनी आप बीती सुनाते हुऐ

आपका

निर्भय सिंह बडेसरा