महावीर जयन्ती पर बिशेष

मानव को दया और अहिंसा  तथा मन की पवित्रता की शिक्षा देने वाले महावीर का जन्म बिहार के वैशाली राज्य के राजपरिवार में हुआ था किन्तु बचपन से ही राज-कार्य या धन-सम्पत्ति आदि के प्रति उनके मन में कोई आकर्षण नहीं था । सांसारिक जीवन में उनको कोई लगाव नही था परहित का सदा उनका मानस जनता में उनको सबसे अलग रखता था दया, क्षमा ,ममता की प्रतिमूर्ति उनको सभी मानते है | 
जैन धर्म के नाम से चलने वाले स्कूलों में भी जैन मंदिरों के समान ही वातावरण  बन जाता है । पूजा-पाठ तथा तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम  प्रस्तुत किये जाते हैं । स्कूल के विद्यार्थी तथा स्त्री-पुरुष भक्ति-भाव से महावीर स्वामी की जय-जयकार करते हुए कहीं-कहीं जुलूस  भी निकालते हैं । शोभा-यात्राओं में जैन साधु-संत सम्मिलित होते हैं । पूरे देश में इस दिन सार्वजनिक छुट्‌टी  रहती है ।
महावीर जयन्ती केवल एक पर्व या उत्सव ही नहीं बल्कि सत्य, सादगी, अहिंसा और पवित्रता का प्रतीक  है । इस पर्व से हमें हर वर्ष यह प्रेरणा  देने का प्रयत्न किया जाता है कि हमें अपने जीवन में झूठ, कपट, लोभ-लालच और दिखावे से दूर रखना चाहिए तथा सच्चा, शुद्ध और परोपकारी जीवन जीना चाहिए त भी अपना और इस संसार का कल्याण संभव है ।

वर्तमान का यक्ष प्रश्न

वर्तमान में अपने भारत की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का यदि अनुशीलन किया जाए तो स्पष्ट होता है कि सर्वत्र अराजकता का परिवेश बना हुआ है। कारण है कि ‘राजा’ का चुनाव करने की प्रक्रिया दोषपूर्ण है, राजा की कोई योग्यता निर्धारित नही की गयी है और देश में राजनीतिक आचार संहिता का कोई प्राविधान नही किया गया है। यदि एक आदर्श राजनीतिक आचार संहिता का पालन करना देश के राजनीतिज्ञों के लिए अनिवार्य कर दिया जाए और यह बता दिया जाए कि राष्ट्रहित के अमुक-अमुक मुद्दों पर भी यदि किसी ने विपरीत सुर निकाले तो उसकी संसद या विधानमंडल की सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी तो देश में आजम खां से लेकर ओवैसी और शाहबुद्दीन से लेकर फारूख अब्दुल्ला तक कितने ही लोगों को जेलों की हवा खानी पड़ जाएगी। लेकिन वर्तमान राजनीति ‘भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के नाम पर देश विरोधी और समाज विरोधी बयान देने वालों या समाज में अराजकता का वातावरण बनाने वालों की ही सुरक्षा में लगी दिखाई देती है। हमारा कहने का अभिप्राय है कि वर्तमान में समाज में लोगों की संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वाले भूमाफिया, नारी का शील हरण करने वाले व्यभिचारी, समाज में साम्प्रदायिकता का विष घोलकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले राजनीतिज्ञ केवल इसलिए खुले घूमते हैं कि उन पर लगाम लगाने वाली कोई राजनीतिक आचार संहिता देश में नही है।
जिस देश में व्यावहारिक तौर पर ये मान लिया जाता है कि राजनेता के पास सौ दो सौ लट्ठ चलाने वाले नही हो वो क्या राजनेता है !!! एक पुरानी कहाबत है "चार लट्ठ का चौधरी पाच लट्ठ का पञ्च , जिसके पीछे छ लाठी वो अन्च गिने न पञ्च " !!! 

राजनीति के वर्तमान निराशाजनक परिवेश पर थोड़ा चिंतन करने की आवश्यकता है। सवा अरब की जनसंख्या के देश के लिए कुल 543 जनप्रतिनिधि देश की लोकसभा में बैठते हैं। अब इनका आचरण देखिए, और इच्छाशक्ति का परीक्षण करिये। इनमें से जितने विपक्ष के सांसद हैं वे सभी देश चलाने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष की मानते हैं और कहते हैं कि-‘चलाओ देश! क्योंकि देश चलाने की जिम्मेदारी जनता ने तुम्हें दी है और हम चलने नही देंगे क्योंकि तुम्हें (वास्तव में देश को) रोकने की जिम्मेदारी देश की जनता ने हमें दी है . इस तरह का गतिरोध क्या देश को आगे ले जाने में सहायक होगा ! गैर राजनैतिक प्रष्ठभूमि के दो राजनैतिक प्रयोग हुए है देश में जिन्हें युवा जोश के तौर पर जाना जाता था एक अस्सी के दशक में असम गन परिषद के प्रफ्फुल मोहंत और वर्तमान में आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल ??? प्रफ्फुल के ज़माने की बात करे तो आज के वनस्पति पहले के दौर में स्वीकार्योक्ति  ज्यादा थी जनादेश का पालन किया जाता था ,भजनलाल जैसे अपवाद अगर छोड़ दिए जाये तो उठा पटक का इतना भयावह दौर वो नही था ! पर आज के दौर में ऐसा कतई नही है दिल्ली में भाजपा की हार  क्या हुयी सरकार चलाना आम आदमी पार्टी को मुश्किल कर दिया . उनके बिधायक भैंस चोरी छेड़छाड़ के मामलो में गिरफ्फ्तार किये गए अंत में लाभ के पद का मामला तो उनके बीस बिधायको को अयोग्य ही घोषित करा दिया .वो तो माननीय न्यायलय ने उनकी सुनी तब जाकर उनकी कुर्सी बची . इस तरह के क्रिया कलापों के क्या मायने निक़ाले  जाये ये सब के सामने है . राष्ट्रपति जैसा गरिमापूर्ण पद भी इस मामले में अपने आपको तट्स्थ नही रख पाया राजनीति का इससे बड़ा हास नही हो सकता ! जरूरत है दोनों सरकारे मिलकर जनता के कल्याण के बारे में सोचे और जनता द्वारा दिए गए जनादेश का पालन करे 

रिश्तों का बदलता स्वरूप


आदमी जब *पत्तल* में खाना खाता था,
मेहमान को देख के वह *हरा* हो जाता था,
स्वागत में पूरा परिवार बिछ जाता था....
बाद में जब वह *मिट्टी के बर्तन* में खाने लगा,
रिश्तों को *जमीन से जुड़कर* निभाने लगा..
फिर जब *पीतल के बर्तन* उपयोग में लेता था,
रिश्तों को *साल छः महीने* में चमका लेता था...
लेकिन बर्तन *कांच* के जब से बरतने लगे,
एक *हल्की सी चोट में रिश्ते बिखरने लगे ...*
अब *बर्तन, थर्मोकोल पेपर के इस्तेमाल होने लगे,*
सारे *सम्बन्ध भी अब यूज़ एंड थ्रो होने लगे ...*
रिश्ते ताजमहल की तरह है साहिब ,दूर से देखने पर बहुत सूंदर लगते है पर इनको खूबसूरत बनाने में कितना वक़्त लगा कोई नही जनता ।जरूरत है हर रिश्ते को शिद्दत से सहेजने की तभी कोई रिश्ता सही रूप ले पाता है ।

आधुनिक जीवन शैली के बदलते ढ़ंग !!!!


एक सेठ के पास में एक गधा और एक कुत्ता ( असली वाला कुत्ता ) था ,सेठ जी जब भी शाम को अपने काम से घर आते ,तो उनका कुत्ता उनके सामने दुम हिलाता लोट्ता कभी दोनों पैर सेठ जी के सीने तक रखता .कभी जूतों को जीभ से चाटता इस मान म्नुब्बल को गधा देखता रहता ! एक दिन गधे ने कुत्ते से पूछा , कुत्ते भाई जब मालिक साहब आते है तो आप रोजाना ऐसा क्यूँ करते हो ??? कुत्ता बोला तुम तो बंधे रहते हो तुम्हे क्या पता , सेठ जी रोजाना मुझे खाने की अलग अलग चीजे लाते है !!! अब आप ही सोचो हमारे ऐसा करने से ही अगर वो खुश हो जाते है तो तुम्हारी तरह बोझा किस लिए ढोना ??? गधे के दिमाग में बात बैठ गयी ......शाम को सेठ जी आये गधा तो दरवाजे के पास ही बंधा रहता था ने दो तीन बार अपना होचिक होचिक ......वाला राग अलापा तो सेठ जी की नजर उस पर गयी !!! गधे ने देखा मौका अच्छा है उसने अपने दोनों पैर सेठ जी के सीने पर और लम्बी जीभ सेठ जी के मुह पर ......... सेठ जी धडाम से जमीन पर !!!!!! . सेठ जी गुस्से से आग बबूला ,बमुश्किल खड़े हुए पास ही रखा एक डंडा उठाया और गधे में देना शुरू . गधे को जमकर पीटा !!! गधा निरपराध सा खड़ा खड़ा आंसू बहा रहा था ! थोड़ी देर में अंदर से कुत्ता आया और गधे की उदासी का कारण पूछा !!!! क्या हुआ गधे भाई बहुत उदास हो ? गधा बोला , क्या बताऊ मेरे भाई हमे तो चमचा गिरी भी नही आती !!!!!! दोस्तों कहानी का सार यही है जो आया जिस काम को उस और न होय .........आप सब आधुनिक कुत्तो से जरुर सावधान रहे !!!!

नोट :-कृपया कोई ब्यक्ति विशेष इसे अपने से जोडकर न देखे ये सिर्फ और सिर्फ कुत्तो के लिए ही है !!!!!

मैं और मेरे तर्क

जिंदगी की जद्दो जहद में ये समय बड़ा तेजी से निकलता है ,इसके भी अपने अपने मायने है । कोई कहता है समय कटता नही और कोई कहता है कि समय मिलता नही । ऐसे में खुद को कहा खड़ा पाते है ये देखने वाली बात है ।
सुख दुःख का अपना दौर है , और इसे सभी अपने अपने तरीके से जीते । आज के  भौतिकवादी युग में सभी एक दूसरे से जीने के तरीके की प्रतिस्पर्धा में ज्यादा लगे हुए है । हमे अपनी जरुरतो के हिसाब से अपने जीने के तरीके अपनाने चाहिए जबकि ऐसा होता नही  । पड़ोसी के घर में फ्रीज ,वाशिंग मशीन, ए सी सभी चीजे हो सकती है और आपके पास उन सब का अभाव है तो इसका असर आपकी व्यवहारिक जिंदगी पर जरूर पड़ेगा । अब इसका पड़ने वाला असर भी हमारी सोच से ही परिलक्षित होता । सोच सकारात्मक है तो आप अपने सबंध पडोसी से मधुर रखेंगे और कभी कभार किसी मौके पर उनके घर से फ्रीज का ठंडा पानी आप ले सकते है । पर यह आपके व्यव्हार पर ही निर्भर करेगा । अगर आप उनके बारे में अपने दिल में नकारात्मक सोच रखते है तो उनके बारें में हमेशा गलत आंकलन करते रहेंगे । हमेशा अपने लिए किसी भी मोके पर उनसे वाद विवाद करने के बहाने तलाशने चाहेंगे । इसका एक उदाहरण ऐसे भीं समझाया जा सकता है । आपने अपनी ऊँगली में सोने की अंगूठी पहनी हुयी है और मेरी ऊँगली कट गयी है । मैं अपनी कटी ऊँगली का दर्द भूल गया ,लेकिन आपकी अंगूठी मेरी जलन का मुख्य कारण है । अगर यही सकारात्मक सोच का अंदाज होता तो मैं खुद यही सोचता कि उसने सोने की अंगूठी अपनी मेहनत से पहनी है और तू तो खुद पहन ही नही सकता क्यूं कि तेरी तो कटी हुयी है । असल में दुःख का कारण यही है । ये दुःख अपनी सोच से ही मिटाया जा सकता है ।
जय श्री राम ।
भगवान राम के जन्मोत्सव का पावन पर्व चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की।नवमी तिथि को मनाया जाता है ।

राम भगवान विष्णु के सबसे पुराने अवतारों में से एक है, जो एक मानव रूप है. भगवान राम का जन्म मध्यान्ह काल में व्याप्त नवमी तिथि को पुष्य नक्षत्र में हुआ था. हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक में श्री राम के रुप में अवतार लिया था. श्रीराम चन्द्र जी का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में कौशल्या की कोख से , राजा दशरथ के घर में हुआ था. दुनिया भर में भक्त इस दिन को शुभ दिन मानते हैं. यह दिन वसंत के मौसम में मनाया जाता है.

यह त्यौहार चैत्र के हिंदू कैलेंडर माह के नौवें दिन आता है. चैत्र के महीने के नौवें दिन राम नवमी का उत्सव पृथ्वी पर परमात्मा शक्ति के होने का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ के बड़े पुत्र राम के रूप में हुआ था। इस दिन भगवान राम के भक्त अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए कुछ विस्तृत रीति-रिवाज करते हैं। राम के जन्म का उद्देश्य रावण की दुष्ट आत्मा को नष्ट करना था। इसलिए राम नवमी का उत्सव धर्म की शक्ति की महिमा , अच्छे और बुरे के बीच शाश्वत संघर्ष को दर्शाता है।

राम नवमी का दिन सूर्य की प्रार्थना करने के साथ शुरू होता है। सूर्य शक्ति का प्रतीक है और हिंदू धर्म के अनुसार सूर्य को राम का पूर्वज माना जाता है इसलिए, उस दिन की शुरुआत में सूर्य को प्रार्थना करने का उद्देश्य सर्वोच्च शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करना होता है।

अयोध्या में राम नवमी उत्सव भगवान राम के जन्मस्थान उल्लेखनीय हैं. जन्म भूमि अयोध्या में यह पर्व बडे हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है. वहां सरयु नदी में स्नान करके सभी भक्त भगवान श्री राम जी का आशिर्वाद प्राप्त करते हैं.राम नवमी से पहले आठ दिन का उपवास किया जाता है. ऐसा माना गया है कि महाकवि तुलसीदास जी ने राम चरित मानस की रचना इसी दिन प्रारम्भ की थी । दिन के प्रारम्भ में सुबह स्नानादि से निब्रत होकर पहले घरो में कुंजक पूजन किया जाता है और साथ ही भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है ।

शहीदी दिवस ,अमर शहीद ,राजगुरु ,सुखदेव भगत सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि

जय हिन्द दोस्तों ।।
शहीदी दिवस पर अपने अपने तरीके से सबने श्रद्धांजलि दी पर क्या कंभी एकं पल भी सोचा है जो बलिदान उन महान सेनानियों ने भारत माता की खातिर दिया क्या उस बलिदान की सार्थकता कही किसी कोने में बची है ,या हर साल यूँ ही खाना पूर्ति करके अपने हाथ झाड़ लेंगे । क्या बर्तमान परिपेक्ष्य को देखा जाये तो शायद सभी बलिदानियों की आत्मा अपने आपको सोचने पर मजबूर होती होगी क्या यही वो हिंदुस्तान है जहा झूठ दम्भ ,जातिवाद ,क्षेत्रवाद भ्र्ष्टाचार अलगाववाद आतंकवाद माओवाद रोजाना देश की जड़े खोखली करने पर अडिग है , दोस्तों प्रण ले इन बुराइयों से निजात पाने की अपनी अपनी सार्थक कोशिश करे और भारतवर्ष को मजबूत बनाये ।
सरदार भगत सिंह जी द्वारा ज्यादातर गुनगुनाने वाली शायरी के उद्वत अंश :

उसे यह फ़िक्र है हरदम,
नया तर्जे-जफ़ा क्या है?
हमें यह शौक देखें,
सितम की इंतहा क्या है?

दहर से क्यों खफ़ा रहे,
चर्ख का क्यों गिला करें,
सारा जहाँ अदू सही,
आओ मुकाबला करें।

कोई दम का मेहमान हूँ,
ए-अहले-महफ़िल,
चरागे सहर हूँ,
बुझा चाहता हूँ।

मेरी हवाओं में रहेगी,
ख़यालों की बिजली,
यह मुश्त-ए-ख़ाक है फ़ानी,
रहे, रहे न रहे।

साभार सरदार भगत  सिंह
आपका
निर्भय सिंह
बडेसरा

#महाराजा भरतपुर

रसिये वाली डूंगरी तोकू सात सलाम ।।
उड़ें कसूमर पागड़ी लज्जा राखे राम ।।
#महाराजा भरतपुर

सुप्रभात ,
हिन्दू नववर्ष 2075 एवम् चैत्र नवरात्र स्थापना दिवस पर आपको हार्दिक शुभकामनाये । माँ भवानी से यही प्रार्थना है क़ि आने वाला नव वर्ष आपके जीवन में खुशियां लेकर आये इन्ही मंगल कामनाओ के साथ ।
आपका
निर्भय सिंह 
बडेसरा

हिंदू नव वर्ष




हिंदू नव वर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मनायी जाती है. ऐसा माना जाता है की सूर्य की प्रथम किरण धरती पर इसी दिन पड़ी थी . ब्रह्मा जी ने भी सृष्टि की रचना की इसी दिन की थी एवं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , एवं रविवार को तिथि को ही सृष्टि की रचना हुई थी . इस वर्ष भी रविवार के दिन ही विक्रम संवत २०७५ शुरू हो रहा है , इस संवत्सर के इस दिन शुरू होने से भाग्यवर्धक रहेगा. भगवान विष्णु भी अपने प्रथम मत्स्य अवतार के रूप में इसी दिन प्रकट हुए थे. इसी दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत भी होती है. कल्प, सृष्टि ,युगादि का यह प्रथम दिन हिंदू धर्म में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है .
सम्राट विक्रमादित्य ने ५७ ईसा पूर्व , उज्जैन में, अपनी विजय के उपलक्ष्य में इस दिन को नव वर्ष के रूप में मनाने की शुरुआत की थी. तभी से नव वर्ष को इसी दिन बड़े धूम धाम से मनाया जाता है एवं संवत्सर को भी इसीलिए विक्रम संवत्सर बोला जाता है. इस दिन उन्होंने अपनी समस्त प्रजा के सभी ऋणो को माफ़ कर दिया था एवं घोषणा की थी की राजा एवं प्रजा के मध्य यह एक नयी शुरुआत का दिन है एवं इसी उपलक्ष्य में इस दिन को, जो सृष्टि की रचना के लिए वैसे ही बहुत महत्वपूर्ण दिन है, इस दिन को नव वर्षके रूप में मनाया जाएगा 



श्रद्धांजलि#स्टीफन हॉकिंग

ब्रिटेन के मशहूर भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया है। वे 76 साल के थे। 1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने वाले स्टीफन हॉकिन्स साइंस की दुनिया के बड़े नाम रहे हैं।
अपनी सफलता का राज बताते हुए उन्होंने एक बार कहा था कि उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है। बीमारी से पहले वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे, लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रहेंगे तो उन्होंने अपना सारा ध्याना रिसर्च पर लगा दिया। हॉकिन्स ने ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च की है।
उन्होंने एक बार कहा था- पिछले 49 सालों से मैं मरने का अनुमान लगा रहा हूं। मैं मौत से डरता नहीं हूं। मुझे मरने की कोई जल्दी नहीं है। उससे पहले मुझे बहुत सारे काम करने हैं। अपने बच्चों को स्टीफन ने टिप्स देते हुए कहा था - पहली बात तो यह है कि हमेशा सितारों की ओर देखो न कि अपने पैरों की ओर।
दूसरी बात कि कभी भी काम करना नहीं छोड़ो, कोई काम आपको जीने का एक मकसद देता है। बिना काम के जिंदगी खाली लगने लगती है। तीसरी बात यह कि अगर आप खुशकिस्मत हुए और जिंदगी में आपको आपका प्यार मिल गया तो कभी भी इसे अपनी जिंदगी से बाहर मत फेंकना।
स्टीफ़न हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया है। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमरीका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है। विश्व उनका और उनके अतुल्य खोजों और कार्यों का सदैव ऋणी रहेगा 

नये नेता

राम राम सा ।
इंसान अपने फायदे के अनुसार व्यवहार करता है , फिर चाहे तरीका कोई भी अपनाना पड़े ? लोग भले से भला और बुरे से बुरा मौका नही छोड़ते ।। कोशिश भी ये जताने की करते है कि वो जो मुद्दा उठा रहे है या क्षेत्र विशेष् की बात कर रहे है उसमे सिर्फ और सिर्फ उन्ही को महारत हासिल है ।प्रतिस्पर्धा के इस युग में गली गली हर कुंचे में रहने वाला इंसान आजकल अपनी और समाज की सामाजिक असमानताओं का ज्ञान रखता है ,लेकिन कहि परिस्थिति बस या किसी और कारण से आगे नही आ पाते । ऐसे में जो स्वयं घोषित परपोषित नए नेता अपने अन्तः करण में झांकने की  ज़हमत उठाएंगे क्या ??? शायद नही ।। अपनी आत्ममुग्धा में मग्न ये तथाकथित जन नेता जब किसी की मौत पर पुहुचते है तो अपनी बात ,किसी की शादी में पुहुचते है तो अपनी बात मेले या सामाजिक समारोह में जाना तो इनका जन्मसिद्ध अधिकार है ,पर परदे के पीछे का काला चेहरा भी जनता जानती है जिनके साथी होने का दम भरने वाले जब खुद उनके नही हुए तो इस भोली भाली जनता के क्या होंगे ।
सावधान रहे ऐसे फरेबियों से ।।। ये सिर्फ जनता को ठगने के अलावा कुछ भी भला नही कर सकते ।।
उम्मीद है जनता इनको पहचानेगी ।
आपका
निर्भय सिंह
बडेसरा

किसान

सूखे में बाढ़ में फ़सलें थी धान की ।।
फिर भी अमीन लाये है नोटिस लगान की ।।
पत्रे में लग्न बहुत थी पंडित भी कम न थे ।
फिर भी कुंवारी रह गयी बेटी किसान की

*स्वभाव*



शुभ प्रभात : दोस्तों ।।
~*HMT (घडी)*~
~*Ambassador (गाडी)*~
~*Nokia (मोबाइल)*~
इन सभी की गुणवक्ता में
कोई कमी नहीं थी फिर भी
बाजार से ~*बाहर*~हो गए
कारण समय के साथ
बदलाव नहीं किया°°
इसलिए व्यक्ति को समयानुसार अपने *व्यापार* एवं अपने *स्वभाव* में भी बदलाव करते रहना चाहिएँ.. 
आपका
निर्भय सिंह

जिँदगी

मायूसियोँ की धूल से हर अक्स है धुँधला तेरा ।।
मैऩे कभी ऐ जिँदगी देखा नही चेहरा तेरा ।।
तू कभी महसूस कर क्या है बिखरने की तडप .
एक रोज बाजी यूँ सजे शीशा तेरा पत्थर मेरा ।।।

चाल चरित्र चेहरा

राम राम सा !!!!
विचारों और आदर्शों का अजीब मानदंड है , हमारे हित में है तो सब जायज है अच्छा बुरा सब अपना हित देख कर तय करते है !! धीरे धीरे सब चीजे बदल रही है जो बात पहले ठीक नहीं थी अब पता नहीं कैसे ठीक होगई !!! चाल चरित्र चेहरा सब की रंगत बदल रही है !!! इस देश में अजीब कहानी है
भाजपा के पास
विजय रुपाणी, जय शाह, शौर्या डोभाल, जयंत सिन्हा,
आर के सिन्हा, मुकुल रॉय, सुखराम, सुशील मोदी,
रेड्डी ब्रदर्स, यदुरप्पा, महेश शाह, अनार पटेल,
रमन सिंह, अमित शाह इत्यादि भ्रष्टाचार के आरोपी नेता है,
फिर भी वह देश की सबसे "ईमानदार पार्टी" है !
भाजपा के पास
आसाराम, गुरमीत राम-रहीम, राघव जी और सेक्स कांड में फँसे
सैकड़ों बाबाओं और नेताओं का साथ और आशिर्वाद रहा है
फिर भी वह देश की सबसे " चरित्रवान पार्टी" है !
भाजपा के पास
संघ के आतंकी संगठन, अजमेर ब्लास्ट के सजायाफ्ता संघी,
कर्नल पुरोहित, दयानंद पांडे, साध्वी प्रज्ञा और ISI के ध्रुव सक्सेना
जैसे 36 एजेन्ट देश की जासूसी करते और आतंकवादी घटना करते
पकड़े गये फिर भी वह देश की सबसे
"देश_भक्त_पार्टी है"
भजपा के पास
पियूष गोयल, पंकजा मुंडे, पूनम महाजन, उद्धव ठाकरे,
पंकज सिंह, अनुराग ठाकुर, राजबीर सिंह, संदीप सिंह,
अभिषेक सिंह, प्रवेश वर्मा, चिराग पासवान, पूरा बहुगुणा खानदान, आशुतोष टंडन, और सैकड़ो अन्य नेताओं के पुत्र विधायक सांसद हैं या राजनीति में महत्वपुर्ण पद पर हैं फिर भी भाजपा राजनीति में "वंशवाद" की विरोधी है !
भाजपा के पास
तमाम गालीबाज साध्वी, योगी जी, संगीत, साक्षी हैं फिर भी भाजपा
इस देश की संस्कार वाली पार्टी है !
इस देश में सारे दंगों में भाजपा या संघ शामिल रही है फिर भी वह इस देश मे सबका साथ की बात करने वाली पार्टी है !
कभी गंगा मैया, कभी गौ माता, कभी वंदे मातरम, कभी जय श्री राम
के नाम पर वोट मांगती है फिर भी धार्मिक नहीं राजनीतिक पार्टी है।यह कैसा संसकार का हैं संसकारों से भरपूर लोग भाजपा में हैं यह कैसी देश भक्ति हैं और संसकार हैं देश आजाद हैं कैसी आजादी हैं !!! अगर यही संस्कार है यही आजादी है तो फिर नहीं चाहिए सब कुछ ये तुम्हे ही मुबारक हम इसका पुरजोर विरोध करते रहेंगे !!!!

आपका
निर्भय सिंह सिनसिनवार
बडेसरा

Good Morning

नयी नयी सुबह, नया नया सवेरा,
सुरज की किरणे, हवाओं का बसेरा,
और मुस्कुराता हुआ, आपका ये चहेरा,
मुबारक हो आपको ये हँसी सवेरा…
सपनो के जहां से अब लौट आओ,
हुई है सुबह अब तूम जाग जाओ,
चाँद-तारो को कहकर अब अलविदा,
इस नये दिन की खुशियों में खो जाओ ।
बित गयी तारों वाली सुनहरी रात,
याद आ गयी फिर वह प्यारी सी बात,
खुशियो से हो हर पल आपकी मुलाकात,
इसलिये मुस्कुराकर कना दिन कि शुरुआत ।

जानिए क्या है विमुद्रीकरण, क्यों लेती हैं सरकारें इसका फैसला और अब तक भारत में कब-कब ऐसा हुआ है?

भारत में कब-कब हुआ है ऐसा विमुद्रीकरण?- पहली बार साल 1946 में 500, 1000 और 10,000 के नोटों का विमुद्रीकरण किया गया था।  1938 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक 10 हजार रुपये से अधिका का नोट नहीं जारी किया है। 1970 के दशक में प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वानचू कमेटी ने कालाधन बाहर लाने और उसे खत्म करने के लिए विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था। लेकिन इस सुझाव के सार्वजनिक हो जाने की वजह से कालाधन रखने वालों ने तत्काल अपने पैसे इधर-उधर निकाल दिए।
1977 में इमरजेंसी हटने के बाद चुनाव हुए और केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी। जनवरी, 1978 में मोरारजी सरकार ने एक कानून बनाकर 1000, 5000 और 10,000 के नोट बंद कर दिए। आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर आईजी पटेल सरकार के इस कदम से सहमत नहीं थे। पटेल के अनुसार ये फैसला कालाधन खत्म करने के बजाय पिछली भ्रष्ट सरकारों को पंगु बनाने के लिए लिया गया है।
अब तक भारत में किसी नोट को पूरी तरह बंद हो बार ही किया गया है लेकिन कई बार पुराने नोट को धीरे-धीरे बंद कर देती है और उसकी जगह उतने ही मूल्य के नए नोट जारी कर देती है। जैसे साल 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेसनीत सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया। 2005 से पहले छापे गए 500 के नोटों के पीछे जारी किए जाने का साल नहीं लिखा होता था। सरकार ने बाजार में चल रहे 500 के नकली नोटों और नोटों की जमाखोरी को खत्म करने के लिए पुराने नोट बंद कर दिए। 500 के पुराने नोटों को बैंकों में नए नोटों से बदलने की सुविधा दी गई थी।
आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट को बंद करने की घोषणा की। हालांकि उन्हें आरबीआई के वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल का समर्थन हासिल है। उर्जित पटेल ने पीएम मोदी के फैसले को “बहुत साहसिक कदम” बताया है। हालांकि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन विमुद्रीकरण को कालाधन बाहर लाने के लिए ज्यादा कारगर नहीं मानते हैं। कई अन्य विशेषज्ञों ने भी इस कदम पर सवाल उठाए हैं। भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के प्रोफेसर अभिरूप सरकार के अनुसार कालाधन रखने वाले ज्यादातर लोग अपने पैसे विदेशी बैंकों में रखते हैं इसलिए देश में विमुद्रीकरण करने से ज्यादा बड़े मछलियों का कुछ नहीं बिगड़ेगा।
नोटबंदी से पहले 500 और 1000 के कितने नोट थे बाजार में?– आरबीआई के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रूपये  मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार कुल देश में तब तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थीं।

**औरत का सम्मान हम सबका सम्मान**

माँ बहन बेटी बहु ये रूप अनेकों रखती है !
कोमल कोमल दो हाथों से काम हजारों करती है !
सारा दिन ये काम करे पर फिर भी नहीं ये थकती है !
औरत ही वो हस्ती है जो हर इक दिल में बसती है !
हर घर में वास है इसका रूप चाहे फिर जो भी हो !
सबको प्यार ये देती है फिर रिश्ता चाहे जो भी हो !
अपने और गैर में भेद नहीं मान ये सबका करती है !
अपनी ख़ुशी से ज्यादा ये ध्यान अपनों का रखती है !
औरत का दिल दरिया है प्यार की ये मूरत है !
छोटा हो या बड़ा चाहे हर जन को इसकी जरूरत है !
माँ बहन बेटी बहु जो करें हजारों काम !
क्या फर्ज हमारा नहीं बनता इनको हम सब दें सम्मान ?
इनको हम सब दें सम्मान इनको हम सब दें सम्मान …!!

भारतीय संस्कृति में नारी

भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। उसे 'भोग की वस्तु' समझकर आदमी 'अपने तरीके' से 'इस्तेमाल' कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है। लेकिन हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए कैसे किय जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है।

महिला दिवस

 महिला दिवस पर सभी आदरणीय स्त्रियों को समर्पित.....
स्त्री क्या है ??
जब भगवान स्त्री की रचना कर रहे थे तब उन्हें काफी समय लग गया आज छठा दिन था और स्त्री की रचना अभी अधुरी थी..
इसिलए देवदुत ने पुछा भगवन आप इस में इतना समय क्यों ले रहे हो...
भगवान ने जवाब दिया क्या तूने इसके सारे गुणधर्म देखे है,,, जो इसकी रचना के लिए जरूरी हैं
यह हर प्रकार की परिस्थितियों को संभाल सकती है
यह एकसाथ अपने सभी बच्चों को संभाल सकती है एवं खुश रख सकती है
यह अपने प्यार से घुटनों की खरोंच से लेकर टुटे हुये दिल के घाव भी भर सकती है
यह सब सिर्फ अपने दो हाथों से कर सकती है
इस में सबसे बड़ा गुनधर्म यह है की बीमार होने पर अपना ख्याल खुद रख सकती है एवं 18 घंटे काम भी कर सकती है
देवदूत चकित रह गया.. और भगवान पूछा क्या यह सब दो हाथों से कर पाना संभव है !!
भगवान ने कहा यह परिपूर्ण रचना है ...
(यह गुनधर्म सभी में है )
देवदुत ने नजदीक जाकर स्त्री को हाथ लगाया और कहा ...
भगवान यह तो बहुत ही सोफ्ट है
भगवान ने कहा हाँ यह बहुत ही सोफ्ट है मगर इसे बहुत स्ट्रांग बनाया है !! इसमें हर परिस्थितियों का संभाल ने की ताकत है..
देवदुत ने पुछा क्या यह सोच भी सकती है...
भगवान ने कहा यह सोच भी सकती है और मजबूत हो कर मुकाबला भी कर सकती है...
देवदुत ने नजदीक जाकर स्त्री के गालों को हाथ लगाया और बोला
भगवान ये तो गीले है... लगता है इसमें से लिकेज हो रहा है...
भगवान बोले यह लिकेज नहीं है। यह इसके आँसू है...
देवदुत: आँसू किस लिए
भगवान बोले : यह भी ईसकी ताकत है ..आँसू इसको फरीयाद करने एवं प्यार जताने एवं अपना अकेलापन दुर करने का तरीका है ..
देवदुत: भगवान आपकी रचना अदभुत है आपने सबकुछ सोच कर बनाया है
आप महान है...
भगवान बोले यह स्त्री रूपी रचना अदभुत है यही हर पुरुष की ताकत है जो उसे प्रोत्साहित करती है.. वह सभी को खुश देखकर खुश रहतीँ है ..हर परिस्थिति में हंसती रहती है । उसे जो चाहिए वह लड़ कर भी ले सकती है....
उसके प्यार में कोइ शर्त नहीं है ..
उसका दिल टूट जाता है जब अपने ही उसे धोखा दे देते है ... मगर हर परिस्थितियों से समझोता करना भी जानती है...
देवदुत: भगवान आपकी रचना संपूर्ण है...
भगवान बोले ना अभी इसमें एक त्रुटि है ,,,
यह अपना महत्वत्ता भुल जाती है ....!!
जय श्री राधे 


सरकार का सपना पूरा हुआ !!!
देश और पंजाब नेशनल बैंक कैश लैश हुआ !!


This is recent made india culture !!!!!

राम राम सा 
ये देशभक्ति मातृभूमि से प्रेम राष्ट्रीयता सब ग़रीबो के लियें ही बने है , माल्या ,नीरव मोदी , ललित मोदी सब कुछ यहीं छोड़ गये ।।। किसी को कोई तकलीफ़ नहीं हुई !!! गज़ब है देश का कानून !
राम राम सा ।।।
पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला आपने देखा ,अभी भारतीय स्टेट बैंक सेवा देने के नाम पर हर किसी के खाते से पैसे काट रही है , अभी और कई घोटाले होंगे ,अपनी नकदी सम्भाल कर रखे ।।। भारतीय रिज़र्व बैंक अपनी पुरजोर कोशिश कर रही है कि इस घोटाले को अभी दबाया जाये । देश का सम्पूर्ण आर्थिक सिस्टम अंदरुनी तौर पर बिखर चुका है ,पता नही क्या होगा इस देश का ।।।।
भारत में फिर से आजा भगवान मुरलिया वाले तू ।।।

#समाज धरोहर ,अपने संस्कार ।।

राम राम जी ,
सबकुं सिख बाहर की देय ।।।
अपनी खाट भीतरी लेय ।।।
गुमराह उनको करो जो कुछ करने लायक नही रहे ,नन्हे नन्हे बच्चों को तो राजनीति से दूर ही रखो ।।। हो सके तो उन्हें संस्कार दो उन्हें कुछ बनने को प्रेरित करो चार पैसे जेब में आने पर आपकी तरह राजनीति तो कभी भी क़ी जा सकती है ।।।

राम राम सा ।जरूरी सुचना , अगर किसी भी बैंक में आपके 100 रूपए खाते में हैं तो उनको निकाल लो .......वरना आप उन्हें ले नही पाएंगे , हर किसी बैंक की हालात दिवालिया जैसी गो गयी है ।। रिज़र्व बैंक ने एक टीम बनाई है जो सभी बैंक की जानकारी इक्कट्ठा कर रही है हालात इतने बुरे है क़ि रिज़र्व बैंक से कुछ कहते नही बन रहा .... किसी भाई को संदेह है तो सुचना के अधिकार के तहत बैंक से जानकारी मांग सकता है ।।।