सेना को कमजोर करने के सरकारी मंसूबे

 राम राम सा 

अग्निवीर !!! अग्निवीर !!!अग्निवीर !!!!

भारतीय सेना ,उसकी एक निजता ,अनुशासन,परम्परा और यूँ कहे पूरा का पूरा ढर्रा ही अलग !! जहाँ तक आम जन की बात है सेना के बारे में सिर्फ कयास लगाए जा सकते हैं उसे समझा नही जा सकता !! सेना में अलग अलग तरह के काम है ,हर कोई अपना महत्व रखता है ,इन्फेंट्री ,आर्म्ड ,आर्टिलरी ,सेवा प्रदाता कोर भी जैसे इंजीनियर, अभियांत्रिकी ,दूरसंचार ,ऑर्डिनेंस सप्लाई ,रक्षा पुलिस ,और भी अनेको शाखाएं बिद्यमान हैं !! इतनी विविधता के लिए एक जवान जब भर्ती होकर ट्रेनिंग से परिपूर्ण अपनी रेजिमेंट में पुहुचता है तो उसे बड़ा अजीब लगता है ,ट्रैनिंग सेंटर पर उसका उद्देश्य सिर्फ शारीरिक प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है असल मे ट्रेनिंग मैं जो सबसे ज्यादा कोई चीज सिखाई जाती है वो है धैर्य किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्य को नही भूलना हमेशा अपनी मंजिल को ध्यान में रखते हुए अग्रसर रहने की प्रेरणा उसे प्रशिक्षण काल से ही मिलती है । जब वह अपनी रेजीमेंट में पुहुचता है तो सबसे पहले उसे रेजीमेंट के इतिहास से रूबरू कराया जाता है ,रेजीमेंट के उद्बोधन वाक्य में ही सुबह  अपने से सीनियर को सुबह की राम राम के तौर कहने को प्रेरित किया जाता है ,इस मे उसे ज्यादा नही एक महीने लगता है !! उसके बाद उनके दिमाग मे अपनी जगह , अपनी प्लाटून ,अपनी कम्पनी ,अपनी रेजीमेंट इसके प्रति लगाव पैदा होता है , इंटर कम्पनी तरह तरह की प्रतियोगिता होती है उनमें अपनी कम्पनी के लिए जी जान लगाना और कैसे भी उसमे अपने को अब्बल रखने की कोशिश जारी रखने की प्रेरणा उन प्रतियोगिताओं में मिलने वाली ट्रॉफियां जिसे कम्पनी के ऑफिस में सजाकर रखा जाता है से मिलती है !! हर रेजीमेंट का अपना एक अलग झंडा होता है और उसका प्रतीक चिन्ह भी इसे आर्मी चीफ द्वारा ही किसी रेजीमेंट को दिया जाता है ,इसे हर किसी रेजीमेंट का आप पवित्र सर्वोपरि देवता या सबसे बड़ा सम्मानीय बस्तु समझ सकते है !! रेजीमेंट इसके लिए मर मिटने से भी पीछे नही हटती !! मेरा कहने का मतलब एक जवान में अपनी प्लाटून ,अपनी कम्पनी अपनी रेजीमेंट ,अपनी ब्रिगेड ,अपना डिवीज़न ,अपनी कोर ,अपनीं कमांड और फिर समूची सेना के प्रति लगाव कूट कूट कर भर दिया जाता है !! इतनी लंबी यात्रा कोई एक दो साल का काम नही ,बहुत समय लगता है ,यही लगाव उसे अपनी रेजीमेंट की शान ,अपने वतन की शान में देश पर अपनी जान निछावर करने को प्रेरित करता है !!! असल मे यह एक पहलू है सेना का दूसरा पहलू यह भी है सरकारों द्वारा अनुमोदित रक्षा बजट का एक हिस्सा सरकारों के चाटुकार बरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा सरकार को बापस करने के नाम अपनी पीठ थपथपाने की नई होड़ पैदा हुई है सैन्य उपकरणों की खरीद लंबे अंतरालों के बाद होती है  अपने सैनिकों के लिए स्वचालित रक्षा उपकरण उपलब्धता समय समय पर होने से उनका रखरखाव विदेशों से आयायित टेक्नोलॉजी को अपने अनुरूप सहेजने में वर्षों लग जाते है फिर उन हथियारों का चलाना अगर पहले बैच ने ही नही सीखा तो वो अगले वाले को क्या सिखाएगा ,टी सीरीज पर आयातित टैंक टेक्नोलॉजी इतनी आसान नही ,एक टैंक पर आपरेटर गनर कमांडर तीन का क्रू अपनी जवाबदेही रखता है ,कमांडर तो शायद अपनी पद प्रतिष्ठा के नाम पर कुछ सीख भी ले जो दसवीं पास नवजवान रेजीमेंट में अपने हथियार को चलाने के लिए गुरु शिष्य का संगम कायम कर पायेगा मुश्किल है , एयर डिफेंस के मामले में सटीक टेक्नोलॉजी का होना जरूरी है वहां ले देकर काम नही चल सकता ,वायरलेस के मामले में जब दुश्मन के इलाके में बैठकर सूचनाओं का आदान प्रदान अपनी रेजीमेंट को करने के लिए रेजीमेंट से सिर्फ 5 साल का जुड़ाव कितना कारगर होगा मुश्किल है ,वैतनिक असमानता भी इसमे सबसे बड़ा रोड़ा साबित होगी ,5 साल के लिए भर्ती युवक की प्राथमिकता रेजीमेंट नही होगी देश नही होगा ,उसकी पहली प्राथमिकता वो खुद उसका परिवार भविष्य की चिंता ......लेकिन इतनी चिंताओं के समावेश वाला जवान देश रक्षा के प्रति कितना समर्पित होगा भविष्य बताएगा !! फिर इसी समय मे उसको दिए जाने वाले अवकाश जो कि हर साल करीब 84 दिन का होगा ?? उस पर अभी कोई चर्चा नही है ,सरकार अपने झूठ के लिए सेना को बलि का बकरा बना रही है ,हमारे रक्षामंत्री जानबूझकर आंखे बंद कर देश के भविष्य को असुरक्षित करने की तरफ अग्रसर है । सरकार असंगठित मजदूरों की कॉलोनी में तब्दील होने की तरफ अग्रसर है 1938-39 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक द्वारा देश के बारे में लिखी पुस्तक का अनुसरण सरकार करने लग गई है ,सरकार की हठधर्मिता इतनी बढ़ गई है कि वो अपने आर्थिक सहयोगियों के लिए हर तरह से अपने दरवाजे खोल रही है ,रक्षा के क्षेत्र में निजी कंपनियों द्वारा लगाए गए गार्ड अनुशासन के मामले में सैन्य कर्मियों जैसे नही होते जब एक बड़े कॉरपोरेट घराने के व्यवसायी अपने कार्यालय पुहुचता है तो उसे वही अपने दोस्त बड़े सैन्य अधिकारी वाली फीलिंग महसूस होती है और उसी जरूरत को सरकार के संज्ञान में लाया गया और सरकार ने इस पर अमल करना भी शुरू कर दिया फिर चाहे देश को कितना ही बड़ा नुकसान क्यों न उठाना पड़े .......मित्रों विरोध कीजिये इस तरह की किसी भी सरकारी पहल जो देश को भी मिटाने के लिए तैयार ही बैठी हो !!! वरना देश मे सिर्फ दो वर्ग बचेंगे एक मजबूत और दूसरा मजबूर । दूसरा किसान आंदोलन पर सरकार की विफलता भी इसका एक कारण है एक बेटा बॉर्डर पर दूसरा आंदोलन में !!! सरकार सेना में भी एक वर्ग बिशेष की ज्यादा हिस्सेदारी बर्दाश्त नही कर पा रही है ....सच मे देश बदल रहा है रिजर्व बैंक खाली है पेट्रोल पंप सूखे पड़े है ,किसान पहले से असहाय है और सेना का भी मनोबल तोड़ने का फरमान सुनाया जा चुका है कतर, ईरान रूस तीनों ने सस्ते पेट्रोल देने से मना कर दिया हम अगला श्रीलंका बनने के बिल्कुल करीब पुहुच चुके हैं, अतः आप सभी से निवेदन इन सरकारी फरमानों का विरोध कीजिये और देश को बचाइए आपसे सहयोग की उम्मीद रखते हुए ....

आपका

निर्भय सिंह बडेसरा