सभी धर्मों में अपने आराध्य की पूजा उपासना, व्रत उपवास के लिये कुछ विशेष त्यौहार मनाये जाते हैं। ताकि रोजमर्रा के कामों को करते हुए, घर-गृहस्थी में लीन रहते हुए बंदे को याद रहे कि यह जिंदगी उस खुदा की नेमत है, जिसे तू रोजी-रोटी के चक्कर में भुला बैठा है, चल कुछ समय उसकी इबादत के लिये निकाल ले ताकि खुदा का रहम ओ करम तुझ पर बना रहे | बात रहमो करम की आयी है तो उस पर नजर करने की जरुरत है ? जो अपने परवरदिगार की पूजा करेगा उसे जन्नत मिलेगी इसमें कोई शक नही है ..लेकिन हाल ही अपनी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में प्रस्तावित इकतरफा  युद्ध विराम से पाक महीने रमजान का कितना सम्बन्ध है ये सरकार में बैठे ज्यादा जानकारो की सोच पर आधारित है !! पर एक बात सरकार ने स्वीकार करली है कि आतंकवाद एक व्यापर सा हो गया है इसमें भी समय रहते उतार चढाव् हो सकता है | केंद्र सरकार अपने आपको राष्ट्रवाद की पैरोकार मानती है पर ये राष्ट्रवाद महबूबा मुफ़्ती के सामने घुटने टेक देता है ये समझ से परे है | कुछ दिन पहले महबूबा मुफ़्ती जम्मू कश्मीर की बिधान सभा में प्रधान मंत्री की तारीफों के पुल बांधती है और उन्ही की अनुशंषा पर केंद्र सरकार एक तरफ़ा संघर्ष विराम की घोषणा   कर देती है !!! इस बात के क्या मायने निकाले  जाए, क्या आतंकवादी नवरात्र के दिनों में संघर्ष विराम करेंगे ? या फिर तथाकथित सरकार भी सेना को सिर्फ और सिर्फ उपभोग की ही वस्तु समझती है | सेना की कमान भी सरकार के हाथो में ही होती है ये बात भी जाहिर हो गयी है ,कुछ दिन पहले जनरल विपिन रावत पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात इस लहजे में कह रहे थे जैसे वो सरकार के कोई मंत्री हो !! विपिन रावत अगर हकीकत में सेना को थोड़ी सी भी स्वायत्तता देना चाह रहे है तो उनके मातहत जो श्रीनगर स्थित 15 वी कोर मुख्यालय में बैठे है उनसे बात करते ,सेना पर हो रहे स्थानीय लोगो के हमलो से निजात दिलाने का प्रयास करते , तो उनकी तथाकथित स्वामी भक्ति पर कोई ऊँगली नही उठाता !! सरकार ने संघर्ष विराम  किया पर क्या सेना को भी कभी इस तरह की सहूलियत मिलेगी ....शायद नही ???  सरकार की मुहबोली बहन महबूबा कभी नही चाहती की सेना को जम्मू कश्मीर में किसी भी तरह की स्वायत्ता मिले | इस पर भी केंद्र सरकार अपनी पीठ थपथपाना बंद नही कर रही ...मसलन घाटे में रहेगी तो हमारी सेना ही रहेगी !!!