आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में इंसान अपने हित के हिसाब से कार्य करता है !! ये क्रिया कलाप सब तरह के होते है ,वो राजनैतिक और सामाजिक आर्थिक सब तरह से अपने अपने स्वार्थ तलाश करता रहता है !! सामाजिक और राजनैतिक दायरा थोडा  बड़ा होता है बनस्पति आर्थिक दायरे के ...आर्थिक दायरा अपनत्व से जुडा होता है पर उसका आधार या सामाजिक होगा या फिर राजनैतिक .इंसान अपने जीवन की पूर्ति के लिए धनार्जन करता रहता है अब उन्हें रास्ता किसी भी तरह का अख्तियार करना पड़े इस बात से खास लगाव नही होता !!! कुछ लोग सामाजिक स्तर  पर इतने मजबूत होते है, कि वो कुछ भी करे लोग उनके किये को गलत मानते ही नही ! समाज के अपने मानदंड है हर इंसान उसमे खरा उतरे ऐसा कतई नही | फिर भी दावे कान कही न कही वो बुराई के पात्र बनते जरुर है . ऐसा ही कमोवेश राजनैतिक जीवन में भी होता है , लेकिन समय के हिसाब  लोगो ने इसे अपने अनुरूप बनाने की असफल  कोशिश करते रहते है !!! जहा जैसी बारिश बैसी छतरी ... राजनैतिक नियुक्ति इसी आधार पर होती है लोग उन्हें ही अपना प्रतिनिधित्व सोंपते है जो कालान्तर में उन्हें आर्थिक या सामजिक तौर पर फायदेमंद हो !!! हमारे देश में संसदीय  लोकतांत्रिक प्रणाली आधारित संघीय सरकार है !! राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमन्त्री शासनाध्यक्ष होता है   राष्ट्रपति जी के नाम पर शासन चलता है .असल में रबर की मुहर ही समझा जाता है ...कुछ राष्ट्रपतियों को छोड़ दिया जाये तो सब आज तक रबर की मुहर ही साबित हुये है ,अपने राजनैतिक दल के प्रति ही वो ज्यादा जवाब देह रहे है !! केंद्र स्तर पर जो भूमिका राष्ट्रपति की है राज्य में वही काम राज्यपाल का है ..लेकिन वो संघीय सरकार के प्रतिनिधि के रूप में ही ज्यादातर अपनी भूमिका निभाता है ....लेकिन अभी के दौर में राज्यपालों की भूमिका संदेह पूर्ण नजर आती है संबिधान के अनुच्छेद 163– राज्यपाल की शक्तियां, राज्यपाल में दो प्रकार की शक्तिया निहित होती है| 1- मुख्यमंत्री(मंरिपरिषद) के सलाह से प्रयोग करने वाली. 2- स्वविवेक के आधार पर प्रयोग की जाने वाली शक्तियां  !!! ये जो  दूसरी वाली शक्ति स्वविवेक वाली बहुत ज्यादा प्रयोग के तौर पर लाई गयी है और इसका दूरगामी दुस्प्रभाव देखने को मिला है !!! राज्यों में होने वाले चुनावो में राजभवन संघीय सरकारों के पार्टी द्फ्तर में तब्दील हो जाते है !!! संघीय सरकार      किसी भी तरीके से अपने को फायदे पुहुचाने वाले जतन करने से नही चूकती !! इसका सबसे बड़ा कारण संघीय सरकारों द्वारा अपनी पार्टी विशेष के  लिए पैसे का इन्त्जाम इन राज्यो से ही होता है और यही कारण है सरकारे अनेतिक काम करने से नही चूकती !!!