राफेल !!! एक और बोफोर्स ।।

चुनावों से एक साल पूर्व हर बार की भांति देश का पारा धीरे धीरे बढ़ना शुरू । आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू । हाल ही सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानों की तल्खी बढ़ी है ,विपक्षी दल ने हमले तेज कर दिए और अपने चुनावी समर में काम आने वाले नारे के रूप में कुछ शब्दों को अपने दल को फायदा पुहुचाने की गर्ज़ से गढ़ लिया है ।
गली गली में शोर है ,चौकीदार ही चोर है । इस पर भाजपा भी चुनावी समर के लिए अपनी कमर कस रही है ।
ताजा तरीन मामला राफेल लड़ाकू विमान को लेकर गरमाया हुआ है ,रक्षा के क्षेत्र में अपनी कोई उपलब्धि न होने के बाबजूद भी यह काम रिलायंस नेवल को मिला जबकि HAL जैसी सरकारी कम्पनी को इससे हाथ मलते हुए रख दिया गया । वर्तमान लड़ाईया में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने बयान से और खलबली मचा दी । आखिर क्या है ये पूरा मामला इसे समझने की बिंदुबार कोशिश करते है ,

ऑफसेट का सीधा सा मतलब है कि राफेल, भारत की कम्पनी को एक तय हिस्से का काम देगा...ये क्लॉज़ UPA ने लगवाया था HAL के लिए..और इसी क्लॉज़ के सहारे मोदी ने अम्बानी को डाल दिया राफेल सौदे में..

● राफेल में 50% ऑफसेट क्लॉज़ था..यानी डील का 50% इन्वेस्टमेंट भारत मे होगा..ये इन्वेस्टमेंट है, मैन्युफैक्चरिंग नही..तो Make In India की बात आधी अधूरी सी है..

● ये 50% हिस्सा राफेल बनाने तक सीमित नही है..कोई भी डिफेंस का सामान इसमे शामिल किया जा सकता है..

● 50% का 74% भारत से एक्सपोर्ट होना चाहिए..ये बहुत कड़ी शर्त लगाई थी UPA ने..इससे भारत को बड़ी विदेशी मुद्रा मिल सकती थी..

● यानी ऑफसेट के मुताबिक टोटल डील का लगभग 37% भारत में ही बनेगा ये तय था..50% का 74% = 37% (ऊपर का पॉइंट वापस देखिए)

● एक्सपोर्ट का मतलब उसकी क्वालिटी और मूल्य इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड के होने चाहिए..उसके बिना एक्सपोर्ट सम्भव नही..यानी HAL विश्वमान्य शस्त्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा था..

● ये काबिलियत भारत मे HAL, L&T, टाटा और महिंद्रा ग्रुप में ही है..पर कांग्रेस ने HAL को चुना था..क्योंकि इसमे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रावधान भी था जो मोदी सरकार ने Dilute किया..

● अगर किसी साल में उस साल के ऑफसेट का काम नही हो पाता तो राफेल को उस मूल्य का 5% जुर्माना भरना पड़ेगा..अब सोचिये राफेल इतना रिस्क अम्बानी पर क्यों लेगा जिसे हवाई जहाज की ABCD नही मालूम?

● पूरी डील लगभग 59 हजार करोड़ की है..असेम्बलिंग भी भारत मे बनना ही माना जायेगा..लगभग 22,000 करोड़ ₹ की विदेशी मुद्रा की कमाई..कितना बड़ा खेल है समझे?

● इसके अलावा ऑफसेट के अनुसार 6% टेक्नोलॉजी शेयरिंग का हिस्सा भी भारत का होना चाहिए..तो 59000 करोड़ का और 6%..यानी 3540 करोड़ ₹ का बोनस HAL को..सोचिये कांग्रेस की दूरदर्शिता..

● ये सरासर झूठ है कि ऑफसेट पार्टनर यानी अंबानी को चुनने में भारत की कोई भूमिका नही है..भारत ने Dassault से डील की फ्रेंच सरकार के माध्यम से..तो Dassault कैसे डील कर सकता है अम्बानी से बिना भारत सरकार के?

लगभग 3 बिलियन € का काम सरकारी कम्पनी को मिलता तो सरकार को भी डिविडेंड मिलता..सरकारी कम्पनी की वैल्यू बढ़ती सो अलग..विदेशी मुद्रा आय, टेक्नोलॉजी जैसे फायदे भी होते..ये किसी प्राइवेट कम्पनी को कोई सरकार क्यों देगी?

ऑफसेट क्लॉज़ लोगो को इससे सहज तरीके से समझाना सम्भव नही..आज के ऑफसेट के बारे में मोदी सरकार कुछ बोलने को तैयार नही है..पर कहानी बना रही है बीजेपी. !!! 
इन तथ्यों से भाजपा मुँह नही मोड़ सकती और न ही अपनी सफाई दे सकती । सरकार में रहकर सरकार या देश को चूना लगाना कैसे जायज है ये प्रश्न भी भाजपा के जी का जंजाल बना हुआ है ।
इतना जरूर है कि ये महज चुनावी स्टंट नही है इसमें बहुत लोगों के हाथ गहराई तक सने है ।जरूरत है इसकी जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए और उसकी निगरानी माननीय उच्चतम न्यायालय करे ,जिससे दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके ।।  इसी उम्मीद में कुछ इसमे नया आयाम लिखा जाए जल्दी न्याय का दरवाजा खुले और देश की जनता को सही जानकारी मिले ।।
आपका
निर्भय सिंह
बडेसरा