आपबीती

 राम राम सा 

दोस्तो ,दुनियां में सब कुछ स्थिर नही है ,न सुख, न दुख , सब एक न एक दिन बदलती छाया जैसा !! लेकिन मन चंचल है जब तक नही मानेगा जब तक कि उसे जिंदगी में टक्कर रूपी अहसास नही हो जाता !! कहानी अपने दुःख की,अपने दर्द की खुद से बड़ा आत्मलोकन करने वाला कोई हो नही सकता !! दुनियां में हर बस्तु उपलब्ध है अब निर्भर अपने आप पर करता है कि आप पाना क्या चाहते हो ! मित्रो बात अगस्त 2016 की है मैं उन दिनों मैं रिलाइंस जिओ में डिप्लॉयमेंट इंजीनियर था ,जिंदगी अपनी रफ्तार से ठीक चल रही थी ,मुझे Gmail पर एक मेल आया और मेल था BHR pharmacuetical company London से भेजने वाले ने बताया कि हमारी कंपनी दौड़ने वाले घोड़े और शेरों के Anti-viral vaccine बनाती है और उसके लिए row material भारत से मंगवाते है !! आप चाहो तो इस business को कर सकते हो ? मैंने उनसे कहा कि आपको अब तक जो सप्लाई दे रहा है उसी से लेते रहो मुझसे क्यों मांग रहे हो ,इस पर जवाब आया कि हम कंपनी के मार्केटिंग ब्रांच से है जो लोग अभी तक हमे सप्लाई दे रहे है उन्होंने रेट बढ़ा दी है और वो हमें बीच का मार्जन नही दे रहा !! मैंने कंपनी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की और इंग्लैंड की कम्पनी मामलों के मंत्रालय को लिखा कम्पनी की विश्वसनीयता के बारे में पूछा ,?सरकारी मंत्रालय का जवाब सकारात्मक था उन्होंने कंपनी का पता भी वही दिया जो मेल में आया था तो भरोसा बढ़ा ,फिर भी एक दूर के रिश्ते का एक बच्चा लंदन में TCS में जॉब करता था उसके द्वारा कंपनी के होने की जानकारी मंगवाई उसने भी कंपनी के मुख्य द्वार का फोटो भेज दिया ,इस पर उसी तथाकथित मार्केटिंग हेड के बताए पते पर बात करना शुरू किया तो काफी दिनों में जवाब आया कि आप हमारे प्रोडक्ट ऑर्गेनिया हर्बल सीड्स को भारत मे भी बेचोगे या बाहर !!अगर बाहर बेचोगे तो हमसे अग्रीमेंट करना पड़ेगा ,उनसे अग्रीमेंट हुआ कि अगर माल नही बिका तो एक महीने में कंपनी माल बापस ले लेगी !! कीमत काफी महंगी थी सिर्फ  100 ग्राम 70 हजार का था ,10 पैकेट के अगस्त 29 , 2016 को 7 लाख उनके खाते में डाले और पुणे महाराष्ट्र से जरिये कोरियर 10 पैकेट आ गए !! उनको लेकर 6 सितंबर 2016 को लेकर दिल्ली गया ,होटल मौर्य शेरटन में एक नाइजीरिया के व्यक्ति से मुलाकात हुई ,उसने सामान देखकर बताया कि यही प्रोडक्ट है ,अब आप अपने स्टॉक में 100 पैकेट दिखाओ तब कंपनी आपसे पूरी साल का सौदा करेगी ,मैंने उनसे अग्रीमेंट किया और धीरे अपने कुछ साथ के परिचितों को भी बताया उन्होंने भी इसमें पैसे लगा दिये ,धीरे धीरे हमने 100 पैकेट  12 दिसम्बर 2016 को अपने पास मंगवा लिए !!पैकेट पूरे होने पर इंग्लैंड कम्पनी को मेल किया कि स्टॉक पूरा है आप सामान ले जाओ !! वहां से जो जवाब आया उसमे लिखा आप मे सप्लायर बनने की क्षमता नही है कम्पनी आपसे कोई लेन देन नही कर सकती !!सुनकर पैरों तले जमीन निकल गयी !!ये साबित हो चुका था कि फ्रॉड हो गया है जो साझीदार फायदे में साझीदार थे अब साहूकार हो गए उसी दौरान 22 दिसम्बर को मेरा भयानक एक्सीडेंट हो गया ,करीब दो महीने हॉस्पिटल में ,घर में चारपाई पर ही पड़ा रहा !! घर पर तगादे आने लगे ,उसी दौरान 2 महीने रिलाइंस आफिस नही जाने पर जॉब छूट गयी !! हार कर 25 फरबरी 2017 को श्री रविन्द्र कुंतल जी एडवोकेट(अब जज बन चुके है ) और राजवीर सिंह जी से मिला ,दो दिन तक ये मामला समझ मे ही नही आया !! फिर 28 फरबरी को न्यायालय में इस्तगासा दाखिल किया ,न्यायालय श्रीमान ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया ,न्यायालय के क्षेत्राधिकार की वजह से ये मामला थाना अटलबन्द को सौंपा गया !! सबसे पहले जांच ASI रामकिशन जी को सौंपी गई उन्होंने जितना बना मई तक काम किया !! एक दिन मैं तत्कालीन CO city आदरणीय आबडदान रतनु सर से मिला और अपनी परेशानी बताई CO साहब ने हाथों हाथ तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर श्री दीपक ओझा जी से फोन पर इस बाबत कहा ,मैं ओझा सर से मिला और जांच उपनिरीक्षक(प्रशिक्षु ) श्री मनीष शर्मा जी को दी बहुत सह्रदय और त्वरित कार्यवाही करते हुए अपनी टीम में इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हेड कांस्टेबल श्री जोगेन्द्र सिंह निबासी बसैया जाट को शामिल करके साथ मे कॉन्स्टेबल अरबिंद कुमार (जो अब शिक्षक ) और कॉन्स्टेबल रविकांत को शामिल करके जुलाई 2017 के पहले हफ्ते में नाइजीरिया निबासी ओकेलु माइकल को लगातार पुणे में 5 दिन रात कड़ी मेहनत करके गिरफ्तार किया ,!! जुलाई 12 ,2017 को इसे कोर्ट में पेश किया और परिणाम आप सबके सामने है ……. मेरे साथ घटित इस पूरे प्रकरण में मुझे बहुत सहयोग मिला उन जगहों से जहाँ से उम्मीद नही थी ,और वो दरवाजे बंद हो गए जहां से उम्मीद रखता था ,मैं अहसानमंद हूँ CI श्री दीपक ओझा जी का sub insp श्री मनीष शर्मा जी का विशेषकर हैडकांस्टेबल श्री जोगेंद्र जी का ,ASI रामकिशन जी का ,CI श्री अनिल डोरिया जी का ,बहुत ही मिलनसार ASI श्री रामगोपाल जी हेडकांस्टेबल उपाध्याय, हेडकांस्टेबल हरवीर सिंह जी अब इस दुनियां में नही रहे भाई मेमलाल जी ,हेडकांस्टेबल भाई प्रहलाद जी कुंतल और समस्त अटलबन्द थाने के स्टाफ ने मुझे सहयोग किया ,मैं कुछ नही कर सकता था लेकिन ये जितने भी नाम है मेरी जिंदगी में भगवान के रूप में आये और मुझे सहयोग किया ,कोर्ट में मामला चलने पर वकील हर तारीख पर फीस मांगता है लेकिन मेरे इस प्रकरण में ये धारणा टूट गयी मेरे वकील मेरे लिए किसी फरिस्ते से कम नही है मुझे बिना किसी लालच के बिना कुछ लिए अब तक सहयोग करते रहे है ...भगवान आप सभी को जीवन की हर तरक्की दे ...यही दुआ करता हूँ 


पेड़ हूं,

हर रोज़ गिरते हैं पत्ते मेरे


फिर भी,

हवाओं से बदलते नहीं रिश्ते मेरे


….जंग जारी है है बाकी फिर कभी ,अपनी आप बीती सुनाते हुऐ

आपका

निर्भय सिंह बडेसरा