मित्रों !!! 8 नबंबर ???
काला दिन, या काला धन !!! अपने अपने तथ्य ,और अपने अपने दावे ?? पर इन सब की तह में कौन जाये !! समाज का हर तबका इससे प्रभावित हुआ है . सबके अपने दुख सबके अपने व्यापारिक मतलब !!!
एक वर्ग रोजाना दो जून की रोटी के लिये मशक्कत कर रहा है तो एक वर्ग ऐसा भी है कि अपने धन्धे का ज्यादातर समय CA के आस पास गुजार रहा है .एक तबका अभी भी उम्मीद लगाये बैठा है कि पता नहीं " मित्रों " जैसा प्यार भरा शब्द न जाने कब कानों में दुबारा फिर से पुहुंच जाये !!! मैं मेरे दुख से दुखी नहीं पर दूसरे के सुख से दुखी हूँ !!! जो दूसरे के सुख से दुखी थे ,वो सरकार के इस तुगलकी फरमान से बहुत खुश हुये!!!!बाकी एक तबका और है जो इस बात की बढ चढ कर तारीफ करता है वो है बिना योग्यता सरकारी नियुक्तियां पाने वाला !!! जिसने कभी सरकारी बस में किराया नहीं दिया ,हजार दो हजार के कमिशन से काम चलाने वाले हमें सरकारी तंत्र की उपयोगिता अपने आका के सामने ऐसे बखान करते है जैसे इलाके में इनके बारे में कोई कुछ नहीं जानता हो ...बड़ी नफरत होती है जब वो अपने चरित्र से उलट भाषण देते है ..पर करोगे क्या ??? एक अंग्रेजी कहावत है " राजनीति भ्रष्ट पुरूष का सबसे अंतिम घर होती है !!!!! तो लडिये इन बेईमांन लोगो से गुबार निकालिये अपना ज़िससे ये हमारे जीवन को खत्म करने वाले कोई तुगलकी फरमान फिर से जारी न कर सके !!!!
उम्मीद है आप सब एक जुट होकर जनमानस के खिलाफ सरकार द्वारा थोपे गये किसी भी फरमान का बिरोध करेंगे !
आपका
निर्भय सिंह बडेसरा