राम राम सा
ERCP में दक्षिण पूर्वी राजस्थान के13 जिलों में जिनमे कोटा बूंदी झालावाड़ बारां भरतपुर करौली धौलपुर सवाईमाधोपुर जयपुर अलवर दौसा अजमेर एवं टोंक को शामिल किया जाना है
ये परियोजना राजस्थान के23.67प्रतिशत क्षेत्र को कवर करेगी जिससे राज्य की 41.13 प्रतिशत आबादी लाभान्वित होगी
ERCP के तहत चम्बलऔर उसकी सहायक नदियां कुन्नू पार्वती कालीसिंध मेज के अतिरिक्त पानी को बनास बाणगंगा गंभीरी नदी में डाला जाएगा
ERCP से दक्षिण पूरी राजस्थान में 2.8 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र जे साथ 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुधार होगा इसके तहत 1268 किलोमीटर कैनाल तंत्र विकसित किया जाएगा ।
ERCP के द्वारा 1723 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पेयजल के लिए 286.4 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM )उधोगों के लिए 1500.4 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM ) सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा
ERCP के द्वारा दिल्ली मुंबई आर्थिक गलियारे ( DMIC) को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा जिससे राज्य में निवेश बढेगा और उधोगों का विकास होगा एवम लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।।
ERCP की राष्ट्रीय जल योजना को 19 नवंबर 2017 को DPR भेजी जा चुकी है फिर भी केंद्र सरकार इसको राष्ट्रीय परियोजना घोषित नही कर ही है।
हम सभी क्षेत्र वासियों को मिलकर इसे केंद्र सरकार से राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाकर इस ओर अतिशीघ्र कार्य शुरू की मांग करनी होगी जिससे दक्षिणी पूर्वी राजस्थान के लोगों को सिचाई, पेयजल के साथ क्षेत्र के उधोगों के लिए जल उपलब्ध हो सके ।
सभी क्षेत्र बासी मिलकर आवाज उठाये जिससे ERCP पर कार्य शुरू किया जा सके ।
अभी केंद्र सरकार में जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी राजस्थान से ही है साथ ही लोकसभा में पूरे 25 सांसद वर्तमान सरकार के दल से है जो कि राज्य का सौभाग्य है ।
DPR में भरतपुर को पानी की उपलब्धता धौलपुर से दिखाई गई है इसमे बहुत बड़ा तकनीकी झोल है धौलपुर से भरतपुर को पानी किसी नहर के जरिये लाना बड़ी टेडी खीर है क्योंकि प्राकृतिक ढलान धौलपुर की तरफ है ऐसे में बिना किसी लिफ्ट के पानी को चढ़ाना मुश्किल है साथ ही भरतपुर की नगर डीग सीकरी कामा तहसीलों तक पानी को पुहुचाने में ज्यादा पैसे की जरूरत होगी ।
भरतपुर को पानी की उपलब्धता उसके प्राकृतिक ढलान के जरिये की जानी चाहिए जिससे जमीन की उपलब्धता और पानी को नौसर्गिक तरीके से समूचे क्षेत्र को उपलब्ध कराया जा सके । जिलेका कुछ भाग जो इन योजना में नही आता है उसको जोड़ने की मांग हम सभी को मिलकर साथ मे करनी है । और उसे DPR में जुड़वाने के लिए सामुहिक प्रयास करने होंगे ।
इस मुद्दे का समाधान हो जाने पर चंबल के पानी आपके खेतो में नहर के द्वारा आ जायेगा जो खेती और पशुधन के लिए कारगर होगा जिससे क्षेत्र की दशा और दिशा बदल जाएगी ।।
आप अभी सम्मानित महानुभावों से निवेदन है आप किसी भी दल या संगठन के सदस्य हैं लेकिन भरतपुर को अपनी पार्टी हितों से ऊपर रखिये इसके लिए सामुहिक प्रयास ही इसमे सफलता दिला सकते हैं ।
आप सभी अपने अपने स्तर से इस मुहिम के लिए पूरे जिले में एक माहौल बनाने की कोशिश करें और सोशल मीडिया प्रिंट मीडिया नुक्कड़ सभाओं द्वारा जनजागृति अभियान चलाए जाएं जिससे हम सब की आवाज केंद्र सरकार के कानों में जाकर सुनाई दे जिससे इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिले और सरकार वित्तीय स्वीकृति जारी करे
इस परियोजना में करीब 40 हजार करोड़ का खर्च आएगा इसका 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा और 10 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान सरकार द्वारा देय होगा ।
आप सभी से पुरजोर निवेदन है आप इस भविष्य की भागीरथी को अपने क्षेत्र के लाने के लिए इस मुहिम का हिस्सा जरूर बने आशा ही नही वरन पूर्ण विश्वास है आप जरूर अपने अपने स्तर से इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे आप सभी से आशातीत
आपका
निर्भय सिंह बडेसरा