हिंदू नव वर्ष




हिंदू नव वर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मनायी जाती है. ऐसा माना जाता है की सूर्य की प्रथम किरण धरती पर इसी दिन पड़ी थी . ब्रह्मा जी ने भी सृष्टि की रचना की इसी दिन की थी एवं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , एवं रविवार को तिथि को ही सृष्टि की रचना हुई थी . इस वर्ष भी रविवार के दिन ही विक्रम संवत २०७५ शुरू हो रहा है , इस संवत्सर के इस दिन शुरू होने से भाग्यवर्धक रहेगा. भगवान विष्णु भी अपने प्रथम मत्स्य अवतार के रूप में इसी दिन प्रकट हुए थे. इसी दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत भी होती है. कल्प, सृष्टि ,युगादि का यह प्रथम दिन हिंदू धर्म में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है .
सम्राट विक्रमादित्य ने ५७ ईसा पूर्व , उज्जैन में, अपनी विजय के उपलक्ष्य में इस दिन को नव वर्ष के रूप में मनाने की शुरुआत की थी. तभी से नव वर्ष को इसी दिन बड़े धूम धाम से मनाया जाता है एवं संवत्सर को भी इसीलिए विक्रम संवत्सर बोला जाता है. इस दिन उन्होंने अपनी समस्त प्रजा के सभी ऋणो को माफ़ कर दिया था एवं घोषणा की थी की राजा एवं प्रजा के मध्य यह एक नयी शुरुआत का दिन है एवं इसी उपलक्ष्य में इस दिन को, जो सृष्टि की रचना के लिए वैसे ही बहुत महत्वपूर्ण दिन है, इस दिन को नव वर्षके रूप में मनाया जाएगा