महावीर जयन्ती पर बिशेष

मानव को दया और अहिंसा  तथा मन की पवित्रता की शिक्षा देने वाले महावीर का जन्म बिहार के वैशाली राज्य के राजपरिवार में हुआ था किन्तु बचपन से ही राज-कार्य या धन-सम्पत्ति आदि के प्रति उनके मन में कोई आकर्षण नहीं था । सांसारिक जीवन में उनको कोई लगाव नही था परहित का सदा उनका मानस जनता में उनको सबसे अलग रखता था दया, क्षमा ,ममता की प्रतिमूर्ति उनको सभी मानते है | 
जैन धर्म के नाम से चलने वाले स्कूलों में भी जैन मंदिरों के समान ही वातावरण  बन जाता है । पूजा-पाठ तथा तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम  प्रस्तुत किये जाते हैं । स्कूल के विद्यार्थी तथा स्त्री-पुरुष भक्ति-भाव से महावीर स्वामी की जय-जयकार करते हुए कहीं-कहीं जुलूस  भी निकालते हैं । शोभा-यात्राओं में जैन साधु-संत सम्मिलित होते हैं । पूरे देश में इस दिन सार्वजनिक छुट्‌टी  रहती है ।
महावीर जयन्ती केवल एक पर्व या उत्सव ही नहीं बल्कि सत्य, सादगी, अहिंसा और पवित्रता का प्रतीक  है । इस पर्व से हमें हर वर्ष यह प्रेरणा  देने का प्रयत्न किया जाता है कि हमें अपने जीवन में झूठ, कपट, लोभ-लालच और दिखावे से दूर रखना चाहिए तथा सच्चा, शुद्ध और परोपकारी जीवन जीना चाहिए त भी अपना और इस संसार का कल्याण संभव है ।