एक सेठ के पास में एक गधा और एक कुत्ता ( असली वाला कुत्ता ) था ,सेठ जी जब भी शाम को अपने काम से घर आते ,तो उनका कुत्ता उनके सामने दुम हिलाता लोट्ता कभी दोनों पैर सेठ जी के सीने तक रखता .कभी जूतों को जीभ से चाटता इस मान म्नुब्बल को गधा देखता रहता ! एक दिन गधे ने कुत्ते से पूछा , कुत्ते भाई जब मालिक साहब आते है तो आप रोजाना ऐसा क्यूँ करते हो ??? कुत्ता बोला तुम तो बंधे रहते हो तुम्हे क्या पता , सेठ जी रोजाना मुझे खाने की अलग अलग चीजे लाते है !!! अब आप ही सोचो हमारे ऐसा करने से ही अगर वो खुश हो जाते है तो तुम्हारी तरह बोझा किस लिए ढोना ??? गधे के दिमाग में बात बैठ गयी ......शाम को सेठ जी आये गधा तो दरवाजे के पास ही बंधा रहता था ने दो तीन बार अपना होचिक होचिक ......वाला राग अलापा तो सेठ जी की नजर उस पर गयी !!! गधे ने देखा मौका अच्छा है उसने अपने दोनों पैर सेठ जी के सीने पर और लम्बी जीभ सेठ जी के मुह पर ......... सेठ जी धडाम से जमीन पर !!!!!! . सेठ जी गुस्से से आग बबूला ,बमुश्किल खड़े हुए पास ही रखा एक डंडा उठाया और गधे में देना शुरू . गधे को जमकर पीटा !!! गधा निरपराध सा खड़ा खड़ा आंसू बहा रहा था ! थोड़ी देर में अंदर से कुत्ता आया और गधे की उदासी का कारण पूछा !!!! क्या हुआ गधे भाई बहुत उदास हो ? गधा बोला , क्या बताऊ मेरे भाई हमे तो चमचा गिरी भी नही आती !!!!!! दोस्तों कहानी का सार यही है जो आया जिस काम को उस और न होय .........आप सब आधुनिक कुत्तो से जरुर सावधान रहे !!!!
नोट :-कृपया कोई ब्यक्ति विशेष इसे अपने से जोडकर न देखे ये सिर्फ और सिर्फ कुत्तो के लिए ही है !!!!!