नये नेता

राम राम सा ।
इंसान अपने फायदे के अनुसार व्यवहार करता है , फिर चाहे तरीका कोई भी अपनाना पड़े ? लोग भले से भला और बुरे से बुरा मौका नही छोड़ते ।। कोशिश भी ये जताने की करते है कि वो जो मुद्दा उठा रहे है या क्षेत्र विशेष् की बात कर रहे है उसमे सिर्फ और सिर्फ उन्ही को महारत हासिल है ।प्रतिस्पर्धा के इस युग में गली गली हर कुंचे में रहने वाला इंसान आजकल अपनी और समाज की सामाजिक असमानताओं का ज्ञान रखता है ,लेकिन कहि परिस्थिति बस या किसी और कारण से आगे नही आ पाते । ऐसे में जो स्वयं घोषित परपोषित नए नेता अपने अन्तः करण में झांकने की  ज़हमत उठाएंगे क्या ??? शायद नही ।। अपनी आत्ममुग्धा में मग्न ये तथाकथित जन नेता जब किसी की मौत पर पुहुचते है तो अपनी बात ,किसी की शादी में पुहुचते है तो अपनी बात मेले या सामाजिक समारोह में जाना तो इनका जन्मसिद्ध अधिकार है ,पर परदे के पीछे का काला चेहरा भी जनता जानती है जिनके साथी होने का दम भरने वाले जब खुद उनके नही हुए तो इस भोली भाली जनता के क्या होंगे ।
सावधान रहे ऐसे फरेबियों से ।।। ये सिर्फ जनता को ठगने के अलावा कुछ भी भला नही कर सकते ।।
उम्मीद है जनता इनको पहचानेगी ।
आपका
निर्भय सिंह
बडेसरा