राम राम जी ,
सबकुं सिख बाहर की देय ।।।
अपनी खाट भीतरी लेय ।।।
गुमराह उनको करो जो कुछ करने लायक नही रहे ,नन्हे नन्हे बच्चों को तो राजनीति से दूर ही रखो ।।। हो सके तो उन्हें संस्कार दो उन्हें कुछ बनने को प्रेरित करो चार पैसे जेब में आने पर आपकी तरह राजनीति तो कभी भी क़ी जा सकती है ।।।
सबकुं सिख बाहर की देय ।।।
अपनी खाट भीतरी लेय ।।।
गुमराह उनको करो जो कुछ करने लायक नही रहे ,नन्हे नन्हे बच्चों को तो राजनीति से दूर ही रखो ।।। हो सके तो उन्हें संस्कार दो उन्हें कुछ बनने को प्रेरित करो चार पैसे जेब में आने पर आपकी तरह राजनीति तो कभी भी क़ी जा सकती है ।।।