शहीदी दिवस ,अमर शहीद ,राजगुरु ,सुखदेव भगत सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि

जय हिन्द दोस्तों ।।
शहीदी दिवस पर अपने अपने तरीके से सबने श्रद्धांजलि दी पर क्या कंभी एकं पल भी सोचा है जो बलिदान उन महान सेनानियों ने भारत माता की खातिर दिया क्या उस बलिदान की सार्थकता कही किसी कोने में बची है ,या हर साल यूँ ही खाना पूर्ति करके अपने हाथ झाड़ लेंगे । क्या बर्तमान परिपेक्ष्य को देखा जाये तो शायद सभी बलिदानियों की आत्मा अपने आपको सोचने पर मजबूर होती होगी क्या यही वो हिंदुस्तान है जहा झूठ दम्भ ,जातिवाद ,क्षेत्रवाद भ्र्ष्टाचार अलगाववाद आतंकवाद माओवाद रोजाना देश की जड़े खोखली करने पर अडिग है , दोस्तों प्रण ले इन बुराइयों से निजात पाने की अपनी अपनी सार्थक कोशिश करे और भारतवर्ष को मजबूत बनाये ।
सरदार भगत सिंह जी द्वारा ज्यादातर गुनगुनाने वाली शायरी के उद्वत अंश :

उसे यह फ़िक्र है हरदम,
नया तर्जे-जफ़ा क्या है?
हमें यह शौक देखें,
सितम की इंतहा क्या है?

दहर से क्यों खफ़ा रहे,
चर्ख का क्यों गिला करें,
सारा जहाँ अदू सही,
आओ मुकाबला करें।

कोई दम का मेहमान हूँ,
ए-अहले-महफ़िल,
चरागे सहर हूँ,
बुझा चाहता हूँ।

मेरी हवाओं में रहेगी,
ख़यालों की बिजली,
यह मुश्त-ए-ख़ाक है फ़ानी,
रहे, रहे न रहे।

साभार सरदार भगत  सिंह
आपका
निर्भय सिंह
बडेसरा