भारत में कब-कब हुआ है ऐसा विमुद्रीकरण?- पहली बार साल 1946 में 500, 1000 और 10,000 के नोटों का विमुद्रीकरण किया गया था। 1938 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक 10 हजार रुपये से अधिका का नोट नहीं जारी किया है। 1970 के दशक में प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वानचू कमेटी ने कालाधन बाहर लाने और उसे खत्म करने के लिए विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था। लेकिन इस सुझाव के सार्वजनिक हो जाने की वजह से कालाधन रखने वालों ने तत्काल अपने पैसे इधर-उधर निकाल दिए।
1977 में इमरजेंसी हटने के बाद चुनाव हुए और केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी। जनवरी, 1978 में मोरारजी सरकार ने एक कानून बनाकर 1000, 5000 और 10,000 के नोट बंद कर दिए। आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर आईजी पटेल सरकार के इस कदम से सहमत नहीं थे। पटेल के अनुसार ये फैसला कालाधन खत्म करने के बजाय पिछली भ्रष्ट सरकारों को पंगु बनाने के लिए लिया गया है।
अब तक भारत में किसी नोट को पूरी तरह बंद हो बार ही किया गया है लेकिन कई बार पुराने नोट को धीरे-धीरे बंद कर देती है और उसकी जगह उतने ही मूल्य के नए नोट जारी कर देती है। जैसे साल 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेसनीत सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया। 2005 से पहले छापे गए 500 के नोटों के पीछे जारी किए जाने का साल नहीं लिखा होता था। सरकार ने बाजार में चल रहे 500 के नकली नोटों और नोटों की जमाखोरी को खत्म करने के लिए पुराने नोट बंद कर दिए। 500 के पुराने नोटों को बैंकों में नए नोटों से बदलने की सुविधा दी गई थी।
आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट को बंद करने की घोषणा की। हालांकि उन्हें आरबीआई के वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल का समर्थन हासिल है। उर्जित पटेल ने पीएम मोदी के फैसले को “बहुत साहसिक कदम” बताया है। हालांकि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन विमुद्रीकरण को कालाधन बाहर लाने के लिए ज्यादा कारगर नहीं मानते हैं। कई अन्य विशेषज्ञों ने भी इस कदम पर सवाल उठाए हैं। भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के प्रोफेसर अभिरूप सरकार के अनुसार कालाधन रखने वाले ज्यादातर लोग अपने पैसे विदेशी बैंकों में रखते हैं इसलिए देश में विमुद्रीकरण करने से ज्यादा बड़े मछलियों का कुछ नहीं बिगड़ेगा।
नोटबंदी से पहले 500 और 1000 के कितने नोट थे बाजार में?– आरबीआई के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रूपये मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार कुल देश में तब तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थीं।